На аҳли дил буд он кӯи дил аз дилбар бигардонад
نه اهل دل بود آن کو دل از دلبر بگرداند
зи саги камтар буд онкас ки рӯи зин дар бигардонад
ز سگ کمتر بود آنکس که رو زین در بگرداند
Маро дил дод ар дилбар нтобам рӯ на печами сар
مرا دل داد ار دلبر نتابم رو نه پیچم سر
Гадои нон талаб дидӣ ки рӯй аз зар бигардонад
گدای نان طلب دیدی که روی از زر بگرداند
Марои бдгўӣ аз он ҳазрат ҳаме хоҳад ки даври уфтам
مرا بدگوی از آن حضرت همی خواهد که دور افتم
Напиндорам ки гардунро чу гови он хар бигардонад
نپندارم که گردون را چو گاو آن خر بگرداند
Бқтъи дӯстии онҷо ки душман дар миён ояд
بقطع دوستی آنجا که دشمن در میان آید
Ду ёри ношикебро з якдигар бигардонад
دو یار ناشکیبا را ز یکدیگر بگرداند
Рақиби тизхўи тарсам ки моро бугсалад аз вай
رقیب تیزخو ترسم که ما را بگسلد از وی
Магасро бодзн бошад ки аз шукр бигардонад
مگس را بادزن باشد که از شکر بگرداند
Ҳаме хоҳам ки дар базмаши суроҳе вор биншинам
همی خواهم که در بزمش صراحی وار بنشینم
Бигард маҷлисам то чанд чун соғар бигардонад
بگرد مجلسم تا چند چون ساغر بگرداند
Азин оташ ки дар ман зад аҷаб набӯд ки дар олам
ازین آتش که در من زد عجب نبود که در عالم
Барои оби ҳайвонам чу Искандар бигардонад
برای آب حیوانم چو اسکندر بگرداند
Чу гандуми андарин тоҳўн хӯрам аз санг ӯ кӯбӣ
چو گندم اندرین طاحون خورم از سنگ او کوبی
Чу обамгар равон дорад чу чархам гар бигардонад
چو آبم گر روان دارد چو چرخم گر بگرداند
з чун ман дӯстии рағбат бдшмн мекунад оре
ز چون من دوستی رغبت بدشمن می کند آری
Чу санг аз зар шавад афзӯнтар азу сар бигардонад
چو سنگ از زر شود افزون تر ازو سر بگرداند
Бтбъи оташӣ бо онкӣ бар хок дарат ҳар шаб
بطبع آتشی با آنکه بر خاک درت هر شب
Боби чашми хунинаши заминро тар бигардонад
بآب چشم خونینش زمین را تر بگرداند
Бгўшт дар намеояд фиғони сайфи фарғонӣ
بگوشت در نمی آید فغان سیف فرغانی
Ки ҳршби гӯши гардунро бинола кар бигардонад
که هرشب گوش گردون را بناله کر بگرداند