Туро ба суҳбати мо сар фурӯ наме ояд

ترا به صحبت ما سر فرو نمی‌آید

зи бандаи шарм чаҳ дорӣ бигӯ наме ояд

ز بنده شرم چه داری بگو نمی‌آید

Ба даври ҳасани ту беруни ошиқии корӣ

به دور حسن تو بیرون عاشقی کاری

Бёзмўдаҳам аз ман накӯ наме ояд

بیازموده‌ام از من نکو نمی‌آید

Дилам ба рӯй ту ҳаргиз намекунад назарӣ

دلم به روی تو هرگز نمی‌کند نظری

Ки тири ғамзаи шӯхат бар ӯ наме ояд

که تیر غمزه شوخت بر او نمی‌آید

Ҳаме хуранд ғамами ошноу бегона

همی‌خورند غمم آشنا و بیگانه

Ки чун ба назд ту он моҳ рӯ наме ояд

که چون به نزد تو آن ماه‌رو نمی‌آید

Трозўиист дар ӯ санги хештани дорӣ

ترازوییست در او سنگ خویشتن‌داری

Чунонкии ҷуз ба зараши сар фурӯ наме ояд

چنانکه جز به زرش سر فرو نمی‌آید

Қарор дод ки оем ба дидан ту шабӣ

قرار داد که آیم به دیدن تو شبی

Кунун қарори з ман рафт ва ӯ наме ояд

کنون قرار ز من رفت و او نمی‌آید

Дилами висол ту мехоҳад инчунин давлат

دلم وصال تو می‌خواهد اینچنین دولت

Ба сабрёфт тавон ва ин азу наме ояд

به صبر یافت توان و این ازو نمی‌آید

Набӯд бо ту марои ишқи рӯзгории азон

نبود با تو مرا عشق روزگاری ازآن

Ба рӯзгори тағайюр дарав наме ояд

به روزگار تغیر درو نمی‌آید

Чаро намекунад андешаи сайфи фарғонӣ

چرا نمی‌کند اندیشه سیف فرغانی

Ки ҳеҷ ҳосили азин гуфтугӯ наме ояд

که هیچ حاصل ازین گفتگو نمی‌آید