Масти ишқат ба худ наёяд боз
مست عشقت به خود نیاید باز
Вари бабрии сараш чу шамъ ба газ
ور بِبُرّی سرش چو شمع به گاز
эй ба некии зи хуби рӯйони фард
ای به نیکی ز خوبرویان فرد
Вай ба хӯбии зи некӯони мумтоз
وی به خوبی ز نیکوان ممتاز
Ҳарки дар соя ту бошад нест
هرکه در سایهٔ تو باشد نیست
Рӯз ӯро ба офтоби ниёз
روز او را به آفتاب نیاز
Ҳаркиро ишқи ту таҳорат дод
هرکه را عشق تو طهارت داد
Дар ду олам наёфт ҷои намоз
در دو عالم نیافت جای نماز
Қибла чун рӯй туаст ошиқ ро
قبله چون روی توست عاشق را
Дил ба сӯии ту ба ки рӯ ба ҳиҷоз
دل به سوی تو به که رو به حجاز
Ишқи ту дар даруни мо азалии сет
عشق تو در درون ما ازلیست
Мо на акнӯн ҳаме кунем оғоз
ما نه اکنون همی کنیم آغاز
Ҳеҷ бедардро нахоҳад ишқ
هیچ بیدرد را نخواهد عشق
Ҳеҷ гунҷишкро нагирад боз
هیچ گنجشک را نگیرد باز
Ишқ бар ман бибаст роҳи висол
عشق بر من ببست راه وصال
Шер бар саг намекунад дар боз
شیر بر سگ نمیکند در باز
То сухан аз пай ту ме гӯям
تا سخن از پی تو میگویم
Булбул аз баҳр гул кунад овоз
بلبل از بهر گل کند آواز
Ишқи султон қоҳираст ва кунад
عشق سلطان قاهر است و کند
Сад чу Маҳмӯдро ғуломи Аёз
صد چو محمود را غلام ایاز
Ҳамчуи Фарҳод бенавое ро
همچو فرهاد بینوایی را
Ишқ бо хусравон кунад анбоз
عشق با خسروان کند انباز
Ҳарки аз баҳр ту нагуфт сухан
هرکه از بهر تو نگفت سخن
Суханаш дар ҳақиқатаст муҷоз
سخنش در حقیقت است مجاز
Дилам аз қавси абрӯат он дид
دلم از قوس ابروت آن دید
Ки ҳадаф аз камони тирандоз
که هدف از کمان تیرانداز
Ба ту ҳасани ту раҳ намӯд маро
به تو حسن تو ره نمود مرا
Буи машкаст машкро ғаммоз
بوی مشک است مشک را غمّاز
Навбат туаст сайфи фарғонӣ
نوبت توست سیف فرغانی
Ба сухани шӯр дар ҷаҳон андоз
به سخن شور در جهان انداز
КоФрин мекунанд бар суханат
کآفرین میکنند بر سخنت
Шукр аз Мисру саъдӣ аз Широз
شکر از مصر و سعدی از شیراز
Сӯзи аҳл ниёз нашносад
سوز اهل نیاز نشناسد
Мутинаъими даруни пардаи ноз
متنعم درون پردهٔ ناز