Агар шабии зи висоли ту ком баргирам
اگر شبی ز وصال تو کام برگیرم
Ғизои ҷони зи лаби ту мудом баргирам
غذای جان ز لب تو مدام برگیرم
Чаҳ бошад аз пас чандини ҳазор нокомӣ
چه باشد از پس چندین هزار ناکامی
Агар ман аз лаби ширинат ком баргирам
اگر من از لب شیرینت کام برگیرم
Дилам бсухт дарин ғам бигӯӣ то аз ту
دلم بسوخت درین غم بگوی تا از تو
Агар маро тамаъӣ ҳаст хом баргирам
اگر مرا طمعی هست خام برگیرم
Ту сайд ман нашӯй вар кунам зи ҷони дона
تو صید من نشوی ور کنم ز جان دانه
Бар он ниҳодами дилро ки дом баргирам
بر آن نهادم دل را که دام برگیرم
Марои зи лаъли лабати бӯса ӣӣ таманно ҳаст
مرا ز لعل لبت بوسه یی تمنا هست
Вагар чунонк набахше бўом баргирам
وگر چنانک نبخشی بوام برگیرم
Муқӣми кӯии туам , дил намекунад рағбат
مقیم کوی توام، دل نمی کند رغبت
Ки хотир аз туу рахт аз мақом баргирам
که خاطر از تو و رخت از مقام برگیرم
Фиғони мурғи саҳари дӯши худ маро нагузошт
فغان مرغ سحر دوش خود مرا نگذاشت
Ки ҳаззи хештан аз ту тамом баргирам
که حظ خویشتن از تو تمام برگیرم
Шамоили ту яке аз яке бадеъ тараст
شمایل تو یکی از یکی بدیع ترست
Бигӯӣ то дили хеш аз кадом баргирам
بگوی تا دل خویش از کدام برگیرم
Сухани зи шарми ту пӯшида то бкӣ гӯям
سخن ز شرم تو پوشیده تا بکی گویم
Ҳиҷоби шубҳаи з рӯй калом баргирам
حجاب شبهه ز روی کلام برگیرم
Маро чу лаъли ту ҳар ҷузв гавҳарӣ гардад
مرا چو لعل تو هر جزو گوهری گردد
Чу шамъ агар зи нигини ту ном баргирам
چو شمع اگر ز نگین تو نام برگیرم
Марои бкоми расон аз лабони худ гарчи
مرا بکام رسان از لبان خود گرچه
Ман ин тамаъ накунам каз ту ком баргирам
من این طمع نکنم کز تو کام برگیرم
Маро агар ту мушарраф кунӣ бдшномӣ
مرا اگر تو مشرف کنی بدشنامی
Маниши биҷои ҳазорон салом баргирам
منش بجای هزاران سلام برگیرم
Каминаи банда ту гуфт сайфи фарғонӣ
کمینه بنده تو گفت سیف فرغانی
Ки бори хизмати ту чун ғулом баргирам
که بار خدمت تو چون غلام برگیرم