Марои боз иттифоқ афтод ишқи сарви болоӣ

مرا باز اتفاق افتاد عشق سرو بالایی

Ки ҳасанаш маҷлис афрӯзасту рӯйиши олами ороӣ

که حسنش مجلس افروزست و رویش عالم آرایی

Марои султон ҳасанаш гуфт агар аз баҳри мо дорӣ

مرا سلطان حسنش گفت اگر از بهر ما داری

Дилии пурхӯни зи андӯҳии сиррии маҷнӯни зи савдое

دلی پرخون ز اندوهی سری مجنون ز سودایی

Баҳр бозӣ макун парчин чу рӯй оби пешонӣ

بهر باذی مکن پرچین چو روی آب پیشانی

Казин сон мавҷандаро дилӣ бояд чу дарёӣ

کزین سان موج انده را دلی باید چو دریایی

Аё бе ишқи ту чун май равонами фитнаи ангезӣ

ایا بی عشق تو چون می روانم فتنه انگیزی

Аё бе зикри ту чун неи забонами боди паймое

ایا بی ذکر تو چون نی زبانم باد پیمایی

Бширинии сухани моро забонат сайд кард оре

بشیرینی سخن ما را زبانت صید کرد آری

Ту сайёди магасгирӣу доми тести ҳалвое

تو صیاد مگس گیری و دام تست حلوایی

Самоъ науммат эй дилбар маро кардаст саргардон

سماع نامت ای دلبر مرا کردست سرگردان

Бёдстӣ бизан то ман зи худ беруни нуҳуми пое

بیادستی بزن تا من ز خود بیرون نهم پایی

Агар малики ду оламро бмни бахшеи яқин май дон

اگر ملک دو عالم را بمن بخشی یقین می دان

Ки напасандам иқоматро бурун аз кӯии ту ҷое

که نپسندم اقامت را برون از کوی تو جایی

Ббхти хешу рои ту тавон андари ту пайвастан

ببخت خویش و رای تو توان اندر تو پیوستن

Куҷо бошад чунон бахт ва кят уфтад чунин рое

کجا باشد چنان بخت و کیت افتد چنین رایی

Чу васлат орзӯ дорам нахоҳам зистан бе ту

چو وصلت آرزو دارم نخواهم زیستن بی تو

Равои дорӣ ки ман мискини бимирам дар таманное

روا داری که من مسکین بمیرم در تمنایی

намедонам бад-ӣни толеъи бурузи васл чун орад

نمی دانم بدین طالع بروز وصل چون آرد

Шаби ҳиҷрони Лайлиро чу маҷнӯни ношикбоиӣ

شب هجران لیلی را چو مجنون ناشیکبایی

Биҷуз ошиқ набинад каси ҷамол рӯй ҷонон ро

بجز عاشق نبیند کس جمال روی جانان را

Намӯдан кор хуршедаст ва дидани кори бенаӣ

نمودن کار خورشیدست و دیدن کار بینایی

Азиз Миср нашносад ки ӯро кист дар хона

عزیز مصر نشناسد که او را کیست در خانه

Камоли ҳасани Юсуфро надонад ҷузи Зулайхое

کمال حسن یوسف را نداند جز زلیخایی

Чу саъдии сайфи фарғонии ҷаҳонро узр ме гуяд

چو سعدی سیف فرغانی جهان را عذر می گوید

На ман танҳо гирифторами бдоми зулфи зебоӣ

نه من تنها گرفتارم بدام زلف زیبایی