Ёрӣ ки менанӯшад аз завқи мо чаҳ донад
یاری که می ننوشد از ذوق ما چه داند
Нохӯрдаи дарди дардаши софи даво чаҳ донад
ناخورده دُرد دردش صاف دوا چه داند
Ҳамдам нагашта бо ҷоми соқии куҷои шиносад
همدم نگشته با جام ساقی کجا شناسد
Майхонаро надидаи базми худо чаҳ донад
میخانه را ندیده بزم خدا چه داند
Ҳолами з ошиқон пресс то бо ту боз гӯйанд
حالم ز عاشقان پرس تا با تو باز گویند
Аз оқилон чаҳ пурсӣ оқили маро чаҳ донад
از عاقلان چه پرسی عاقل مرا چه داند
Аз ҷоми ибтилояши завқӣ ки мубталои рост
از جام ابتلایش ذوقی که مبتلا راست
Ҳар кӯи балои надидаи завқи бало чаҳ донад
هر کو بلا ندیده ذوق بلا چه داند
Гуяд ки моҷроӣӣ бо ринд маст дорам
گوید که ماجرائی با رند مست دارم
Риндӣ ки маст бошад ӯ моҷаро чаҳ донад
رندی که مست باشد او ماجرا چه داند
Нурӣ ки дар дили мости хуршед зарра ӯст
نوری که در دل ماست خورشید ذرهٔ اوست
Ҳар бе басари зи кӯрии нуру зё чаҳ донад
هر بی بصر ز کوری نور و ضیا چه داند
Султон хабар надорад аз ҳоли неъмати аллоҳ
سلطان خبر ندارد از حال نعمت الله
Асрори подшоҳии марди гадо чаҳ донад
اسرار پادشاهی مرد گدا چه داند