Ба ҳар тараф ки назар мекунам тўӣии манзур
به هر طرف که نظر می کنم توئی منظور
Ки дидааст чунин фоши ин чунин мастур
که دیده است چنین فاش این چنین مستور
зи лутфи ту назарӣ ёфтам шудӣ нозир
ز لطف تو نظری یافتم شدی ناظر
Чаҳ ҷои ман ки тўӣии нозиру тўӣии манзур
چه جای من که توئی ناظر و توئی منظور
Чу нест дар ду ҷаҳони ҷузи яке крости висол
چو نیست در دو جهان جز یکی کراست وصال
Аҷаб буд ки яке аз яке буд мастур
عجب بود که یکی از یکی بود مستور
Ба нури талъат ӯ равшанаст дидаи ман
به نور طلعت او روشن است دیدهٔ من
Бибин ки дар ҳамаи олами ҷуз ӯ ки дорад нур
ببین که در همه عالم جز او که دارد نور
з завқ гуфтаам ин шеър бишинав аз сари завқ
ز ذوق گفته ام این شعر بشنو از سر ذوق
Касе ки завқ надорад зи базми мо гӯи давр
کسی که ذوق ندارد ز بزم ما گو دور
Мақоми аҳли длонсти суҳбати ҷонам
مقام اهل دلانست صحبت جانم
Чаҳ ҷои равзаи ризвон чаҳ қадари ҳуру қусӯр
چه جای روضهٔ رضوان چه قدر حور و قصور
Ҳарифи Сайидаму соқии хроботм
حریف سیدم و ساقی خراباتم
Мудоми ошиқи мастам на оқили махмур
مدام عاشق مستم نه عاقل مخمور