згар мхўиити оташи зи лола зор гурехт
ز گر مخوییت آتش ز لاله زار گریخت
зи заҳри чашми ту сайёд аз шикор гурехт
ز زهر چشم تو صیاد از شکار گریخت
Магар ба гардиши чашми ту соли ошиқи гашт
مگر به گردش چشم تو سال عاشق گشت
Ки ид ношудаи имсол ӯ ба пор гурехт
که عید ناشده امسال او به پار گریخت
Рамидаи шаҳр ба саҳрои зи дил тапидан ман
رمیده شهر به صحرا ز دل تپیدن من
Ба ин умед ки пурсад касе чикор гурехт ?
به این امید که پرسد کسی چکار گریخت؟
Тапидани дилӣ аз биқрорим гул кард
تپیدن دلی از بیقراریم گل کرد
Ки ранги ваъдаи зи симоӣ интизор гурехт
که رنگ وعده ز سیمای انتظار گریخت
Ҳунари гудохта будаш зхлъти рангин
هنر گداخته بودش زخلعت رنگین
Гуҳари зшрм ба домон кӯҳсор гурехт
گهر زشرم به دامان کوهسار گریخت
Ватан шинос шавам шояд аз диёри ғариб
وطن شناس شوم شاید از دیار غریب
Шамеми гули зхҷолт ба хорзор гурехт
شمیم گل زخجالت به خارزار گریخت
Магӯ шарор чаро шуд ба санги хораи ниҳон
مگو شرار چرا شد به سنگ خاره نهان
зи шухии нафаси сард рӯзгор гурехт
ز شوخی نفس سرد روزگار گریخت