Фурсати маҷнӯн агар дунбол маҳмил ме гирифт

فرصت مجنون اگر دنبال محمل می گرفت

Нақши пои ноқаи саҳро дар слосл ме гирифт

نقش پای ناقه صحرا در سلاسل می گرفت

Барда бепрўоиим то сайдгоҳи муддао

برده بی پرواییم تا صیدگاه مدعا

Саъии ботили ҳарза бар худ кор мушкил ме гирифт

سعی باطل هرزه بر خود کار مشکل می گرفت

Рафтаам аз хотираши тақрйв фарёдӣ куҷост

رفته ام از خاطرش تقریب فریادی کجاست

Коши ҷои ошнои кӣна дар дил ме гирифт

کاش جای آشنایی کینه در دل می گرفت

Дар паноҳи доғат аз маҳшар чаҳ парвои доштам

در پناه داغت از محشر چه پروا داشتم

Гар ғуборами баъди мурдани доман дил ме гирифт

گر غبارم بعد مردن دامن دل می گرفت

Дар биёбони талаби оворагеи сайёд буд

در بیابان طلب آوارگی صیاد بود

Шавқи мо дргоми аввали сайд манзил ме гирифт

شوق ما درگام اول صید منزل می گرفت

То чҳо шарманда рӯй муҳаббат ме шудӣ

تا چها شرمنده روی محبت می شدی

Гар дилати ойӣнаи мо дар муқобил ме гирифт

گر دلت آیینه ما در مقابل می گرفت

Гар тамошои шиква Эй медошт аз мижгони асир

گر تماشا شکوه ای می داشت از مژگان اسیر

Хӯни мо ҳасрати кашони домон қотил ме гирифт

خون ما حسرت کشان دامان قاتل می گرفت