Гузаштаем зи сар то ба нақши по чаҳ расад
گذشته ایم ز سر تا به نقش پا چه رسد
Бурӣдаем зи дил то ба муддао чаҳ расад
بریده ایم ز دل تا به مدعا چه رسد
Ба ҳар ки буд насибии з ҳар чаҳ дошт расед
به هر که بود نصیبی ز هر چه داشت رسید
Ситамгарон ҳама чашмем каз шумо чаҳ расад
ستمگران همه چشمیم کز شما چه رسد
Ту масти бодаи нозии куҷои хабари дорӣ
تو مست باده نازی کجا خبر داری
Ки аз хумори тағофул ба ҷони мо чаҳ расад
که از خمار تغافل به جان ما چه رسد
Ба ин дил аз чу туе шиква ме тавон кардан
به این دل از چو تویی شکوه می توان کردن
зи хӯни хеши гузаштам ба хўнбҳо чаҳ расад
ز خون خویش گذشتم به خونبها چه رسد
зи нохудои гиреҳии воншд ба баҳру сафар
ز ناخدا گرهی وانشد به بحر و سفر
Биёи асири бубинем каз худо расад
بیا اسیر ببینیم کز خدا رسد