Хуррам касе ки дил ба ғамат шод ме кунад

خرم کسی که دل به غمت شاد می‌کند

Гулзори хотирӣ ки туро ёд ме кунад

گلزار خاطری که تو را یاد می‌کند

Сайди мурод агар нашавад роми ман чаҳ бок

صید مراد اگر نشود رام من چه باک

Хӯн дар дилами тағофул сайёд ме кунад

خون در دلم تغافل صیاد می‌کند

Гуфтам ниҳон кунам зи ту ҳам рози дил чаҳ суд

گفتم نهان کنم ز تو هم راز دل چه سود

Аз даври захми теғи ту фарёд ме кунад

از دور زخم تیغ تو فریاد می‌کند

Имрӯзи кас ба ҳиммати сарви қад ту нест

امروز کس به همت سرو قد تو نیست

Ҳар бандае ки май хирад озод ме кунад

هر بنده‌ای که می‌خرد آزاد می‌کند

Шуд шод аз ӯ дигар дили ғами дидаи асир

شد شاد از او دگر دل غم‌دیدهٔ اسیر

Давр аз ғами он дилӣ ки дилӣ шод ме кунад

دور از غم آن دلی که دلی شاد می‌کند