Дилами зиёди нигоҳат ба шавад ме ояд
دلم زیاد نگاهت به شور میآید
Чароғи хилватам аз базм тавр ме ояд
چراغ خلوتم از بزم طور میآید
Видоъ ҳастӣ худ мекунам қарорам нест
وداع هستی خود میکنم قرارم نیست
Ҳамин басаст ки дидам з давр ме ояд
همین بس است که دیدم ز دور میآید
Ғубори роҳи қаноат ки пайки аҳл дил аст
غبار راه قناعت که پیک اهل دل است
зи пойтахти сулаймон мӯр ме ояд
ز پایتخت سلیمان مور میآید
Гузашти муддати умрам ба аҷзу ғофил аз ин
گذشت مدت عمرم به عجز و غافل از این
Ки хоксории ишқ аз ғурур ме ояд
که خاکساری عشق از غرور میآید
Ба сӯем аз дили овораи нома Эй дорад
به سویم از دل آواره نامهای دارد
Нигоҳи қосидам аз роҳ давр ме ояд
نگاه قاصدم از راه دور میآید
Шароб аз ғами лаълаши асир бскаҳ гудохт
شراب از غم لعلش اسیر بس که گداخت
Ба базми бодаи кашон беҳузур ме ояд
به بزم بادهکشان بی حضور میآید