Бизан ки сӯзи дили ман ба соз май гӯйӣ

بزن که سوز دل من به ساز می‌گویی

зи сози дил чаҳ шунидӣ ки боз май гӯйӣ

ز ساز دل چه شنیدی که باز می‌گویی

Магар чу боди вазидӣ ба зулфи ёр ки боз

مگر چو باد وزیدی به زلف یار که باز

Ба гӯши дили сухании дили навоз май гӯйӣ

به گوش دل سخنی دل‌نواز می‌گویی

Магари ҳикоят парвона мекунӣ бо шамъ

مگر حکایت پروانه می‌کنی با شمع

Ки шарҳи қисса ба сӯзу гудоз май гӯйӣ

که شرح قصه به سوز و گداز می‌گویی

Ба ёди тешаи Фарҳоду мавкиби ширин

به یاد تیشه فرهاد و موکب شیرین

Гуҳии зи шӯру гуҳ аз шоҳноз май гӯйӣ

گهی ز شور و گه از شاهناز می‌گویی

Кунун ки рози дили мо зи парда берун шуд

کنون که راز دل ما ز پرده بیرون شد

Бизан ки дар дили ин пардаи роз май гӯйӣ

بزن که در دل این پرده راز می‌گویی

Ба пои чашмаи табъи ман ин баланди сурӯд

به پای چشمه طبع من این بلند سرود

Ба сарфарозии он срўноз май гӯйӣ

به سرفرازی آن سروناز می‌گویی

Ба сар расед шабу достон ба сар нарасед

به سر رسید شب و داستان به سر نرسید

Магари фасонаи зулфи дароз май гӯйӣ

مگر فسانه زلف دراز می‌گویی

Дилам ба сози ту рақсад ки худ чу пайки сабо

دلم به ساز تو رقصد که خود چو پیک صبا

Паёми ёр ба сад эҳтизоз май гӯйӣ

پیام یار به صد اهتزاز می‌گویی

Ба сӯии арши илоҳӣ гушӯдаам пару бол

به سوی عرش الهی گشوده‌ام پر و بال

Бизан ки қиссаи розу ниёз май гӯйӣ

بزن که قصه راز و نیاز می‌گویی

Навой соз ту хонд таронаи тавҳид

نوای ساز تو خواند ترانه توحید

Ҳақиқатӣ ба забони муҷоз май гӯйӣ

حقیقتی به زبان مجاز می‌گویی

Таронаи ғазали шаҳриёр ва соз сабост

ترانه غزل شهریار و ساز صباست

Бизан ки сӯзи дили ман ба соз май гӯйӣ

بزن که سوز دل من به ساز می‌گویی

Хониш
ғзл шморҳ 126 - соз сбо — прӣ соткнӣ ъндлӣб