Сабо ба шавқ дар айвон шаҳриёр омад
صبا به شوق، در ایوان شهریار آمد
Ки хезу сар ба дар аз дахма кун баҳор омад
که خیز و سر به در از دخمه کن، بهار آمد
зи зулфи зркши хуршеди банди сими се тор
ز زلف زرکش خورشید بند سیم سهتار
Ки пардаҳои шаби тираи тор ва мор омад
که پردههای شب تیره تار و مار آمد
Ба шаҳр чанд нишинии шикаста дил бархез
به شهر چند نشینی شکستهدل، برخیز
Ки боғу бешаи шимурони шукуфа зор омад
که باغ و بیشهٔ شمران شکوفهزار آمد
Ба сони духтари чодрншини саҳройӣ
به سان دختر چادرنشین صحرایی
Арӯси лола ба домон кӯҳсор омад
عروس لاله به دامان کوهسار آمد
Фиканд замзамаи глпўнаҳ эй ба барзану кӯ
فکند زمزمه گلپونهای به برزن و کو
Ба боми кулбаи парастуӣ зарнигор омад
به بام کلبه پرستوی زرنگار آمد
Гушӯд пер дар хаму боғбон дар боғ
گشود پیر دَرِ خُمّ و باغبان در باغ
Шаробу шаҳд ба бозору гул ба бор омад
شراب و شهد به بازار و گل به بار آمد
Дигар ба ҳуҷра нагунҷад димоғи савдое
دگر به حجره نگنجد دماغ سودایی
Ки бо насими саҳари буии зулф ёр омад
که با نسیم سحر بوی زلف یار آمد
Бизан сабӯҳӣ ва баргир зери хирқаи се тор
بزن صبوحی و برگیر زیر خرقه سهتار
Ғазал биор ки булбул ба шохсор омад
غزل بیار که بلبل به شاخسار آمد
Буруни хиром ба гулгашти лолаи зори имрӯз
برون خرام به گلگشت لالهزار امروز
Ки лолаи зори пар аз сарви гул изор омад
که لالهزار پر از سرو گلعذار آمد
Сабо ба ҳайат гул шуд вазири таблиғот
صبا به هیئت گل شد وزیر تبلیغات
Биор бода ки кабина рӯй кор омад
بیار باده که کابینه روی کار آمد
Хуҷастаи бод ба Эрони бостони наврӯз
خجسته باد به ایران باستان نوروز
Ки ёдгори зи ҷамшед комкор омад
که یادگار ز جمشید کامکار آمد
Чаҳ ҷои лшгрк эй шоҳидони искии боз
چه جای لشگرک ای شاهدان اسکیباز
Ки барф об шуду кӯҳ ашкбор омад
که برف آب شد و کوه اشکبار آمد
Кунун ки буии гулу муждаи саломати шоҳ
کنون که بوی گل و مژدهٔ سلامت شاه
Раседу марҳами дилҳои доғдор омад
رسید و مرهم دلهای داغدار آمد
Шукуфтаи дор ба баргу навои ятемон ро
شکفته دار به برگ و نوا یتیمان را
Ки кӯдакони чаман низ нўнўор омад
که کودکان چمن نیز نونوار آمد
Ба давр ҷом мем дод дил бидиҳ соқӣ
به دور جام مِیَم دادِ دل بده ساقی
Чаҳҳо ки бар серум аз давр рӯзгор омад
چهها که بر سرم از دور روزگار آمد
Ба пои сози сабои шеъри шаҳриёр эй тарк
به پای ساز صبا شعر شهریار ای ترک
Бихон ки идии ушшоқ беқарор омад
بخوان که عیدی عشاق بیقرار آمد