Ёди он ки ҷуз ба рӯй маниши дида во набӯд

یاد آن که جز به روی منش دیده وا نبود

Ваон сусти аҳди ҷузи сиррӣ аз мо сўо набӯд

وان سست عهد جز سری از ما سوا نبود

Имрӯз дар миёнаи кудурати ниҳодаи пой

امروز در میانه کدورت نهاده پای

Он рӯз дар миёни ману дӯст ҷо набӯд

آن روز در میان من و دوست جا نبود

Кас дил намедиҳад ба ҳабибӣ ки бе вафост

کس دل نمی‌دهد به حبیبی که بی‌وفاست

Аввали ҳабиби ман ба худо бевафо набӯд

اول حبیب من به خدا بی‌وفا نبود

Дил бо умеди васл ба ҷони хости дарди ишқ

دل با امید وصل به جان خواست درد عشق

Он рӯзи дарди ишқи чунин бедаво набӯд

آن روز درد عشق چنین بی‌دوا نبود

То ошнои мо сар бегонагон надошт

تا آشنای ما سر بیگانگان نداشت

Ғам бо дили рамидаи мо ошно набӯд

غم با دل رمیده ما آشنا نبود

Аз ман гузашт ва ман ҳам аз ӯ бигузарам вале

از من گذشت و من هم از او بگذرم ولی

Бо чун манӣ ба ғайри муҳаббат раво набӯд

با چون منی به غیر محبت روا نبود

Дӯшам нахуфт дида ба болини дил вале

دوشم نخفت دیده به بالین دل ولی

Мискини дилам ба заҳмати мардум ризо набӯд

مسکین دلم به زحمت مردم رضا نبود

Акнӯн ба кӯдакӣ ки набудам асири ишқ

اکنون به کودکی که نبودم اسیر عشق

Афсӯс мехӯрам ки дилам бо худо набӯд

افسوس می‌خورم که دلم با خدا نبود

Гар ноӣ дил набӯду дами оҳи сарди мо

گر نای دل نبود و دم آه سرد ما

Бозори шавқу гармии шӯр ва наво набӯд

بازار شوق و گرمی شور و نوا نبود

Сӯзӣ надошт шеъри дили ангези шаҳриёр

سوزی نداشت شعر دل‌انگیز شهریار

Гар ҳамраҳи таронаи соз сабо набӯд

گر همره ترانه ساز صبا نبود

Хониш
ғзл шморҳ 61 - бозор швқ — прӣ соткнӣ ъндлӣб