Чаҳ шуд он аҳди қадим ва чаҳ шуд он ёри надим
چه شد آن عهد قدیم و چه شد آن یار ندیم
Хӯн кунад хотири ман хотираи аҳди қадим
خون کند خاطر من خاطره عهد قدیم
Чаҳ шудан он турраи пайванди дилу ҷон ки дигар
چه شد آن طره پیوند دل و جان که دگر
Дили бишкастаи ошиқи ннўозд ба насим
دل بشکسته عاشق ننوازد به نسیم
Он дили бозтар аз дасти Каримам ёрб
آن دل بازتر از دست کریمم یارب
Чун писандӣ ки шавад тангтар аз чашми лӣим
چون پسندی که شود تنگتر از چشم لئیم
Аҳди тифлӣ чу биёади орму домони падар
عهد طفلی چو بیاد آرم و دامان پدر
БоРом аз дида ба домони ҳамаи дарҳои ятем
بارم از دیده به دامان همه درهای یتیم
Ёд бигузашта чу он давр намой ватан аст
یاد بگذشته چو آن دور نمای وطن است
Ки шавад броФқи шоми ғарибони тарсим
که شود برافق شام غریبان ترسیم
ё ба оҳӯи Рӯшони инси всФои даҳ ёрб
یا به آهو روشان انس وصفا ده یارب
ё зи соҳибназарони бозстони завқи салим
یا ز صاحبنظران بازستان ذوق سلیم
Сим ва зар шуд маҳаки таҷрибаи гавҳари мард
سیم و زر شد محک تجربه گوهر مرد
Ки сияҳи боди бад-ӣни таҷриба рӯй зару сим
که سیه باد بدین تجربه روی زر و سیم
Дарднокаст ки дар дом шағол уфтад шер
دردناک است که در دام شغال افتد شیر
ё ки муҳтоҷ фурӯмоя шавад марди Карим
یا که محتاج فرومایه شود مرد کریم
Нашавад мурғи чамани ҳамнафаси зоғу заған
نشود مرغ چمن همنفس زاغ و زغن
“и рӯҳро суҳбати ноҷинс ъзобист ?илем ”
“روح را صحبت ناجنس عذابیست الیم”
Давлати ҳиммати султон қаноат хоҳам
دولت همت سلطان قناعت خواهم
То таманно накунам неъмати арбоби Наим
تا تمنا نکنم نعمت ارباب نعیم
Ҳам аз алтофи ҳумоюн ту хоҳам ёрб
هم از الطاف همایون تو خواهم یارب
Дар балоёии ту тавфиқи ризоу таслим
در بلایای تو توفیق رضا و تسلیم
Нақс дар маърифати мости нигорои вар на
نقص در معرفت ماست نگارا ور نه
Нест бе маслиҳатии ҳукми худованди ҳаким
نیست بی مصلحتی حکم خداوند حکیم
Шаҳрёро ба ту ғами улфат дерин дорад
شهریارا به تو غم الفت دیرین دارد
Муҳтарами дор ба ҷони суҳбати ёрони қадим
محترم دار به جان صحبت یاران قدیم