Шҳо ту моҳӣу меҳрат ба дили гирифтаи қарор
شها تو ماهی و مهرت به دل گرفته قرار
Ба бандагӣ ту дорам ман аз азали иқрор
به بندگیّ تو دارم من از ازل اقرار
Туе ки моҳ банӣ ҳошимат ҳаме хонанд
تویی که ماه بنی هاشمت همی خوانند
Дар осмони никуӣ ва дар сипеҳри виқор
در آسمان نکویی و در سپهر وقار
Ту офтоби ҳиҷозӣу моҳи канъонат
تو آفتاب حجازی و ماه کنعانت
Калофи ҷон ба кафи дили ниҳода дар бозор
کلاف جان به کف دل نهاده در بازار
Шҳо ту Юсуфи ҳасанӣу Юсуфони ҷаҳон
شها تو یوسف حُسنی و یوسفان جهان
Ба пеши ҳасани ту чун сӯратанд бар девор
به پیش حُسن تو چون صورتند بر دیوار
Турои чунонкӣ ту ҳастӣ мдиҳ натавон кард
ترا چنانکه تو هستی مدیح نتوان کرد
Ки ақлро ба сари кӯй ишқ набӯд бор
که عقل را به سر کوی عشق نبود بار
Сафири ақли куҷои раҳи барад , ба кишвари ишқ
سفیر عقل کجا ره برد، به کشور عشق
Ки ҷои ишқ баландасту раҳи басии душвор
که جای عشق بلند است و ره بسی دشوار
Амири кишвари ишқӣ ва дар вафодорӣ
امیر کشور عشقی و در وفاداری
Наёмадааст ва наёяд ба асрӣ аз аъсор
نیامده است و نیاید به عصری از اعصار
Паии вафои ҳусайни ӣнқадари фишурдии пой
پی وفای حسین اینقدر فشردی پای
Ки ҳар ду даст бирафтат зи дасту даст аз кор
که هر دو دست برفتت ز دست و دست از کار
Ба остони ту савганди костона ӣ ту
به آستان تو سوگند کاستانه ی تو
зи арши бартар ва болотараст чандини бор
ز عرش برتر و بالاتر است چندین بار
Асоси қасри ҷалоли ту бскаҳ ҳаст рафеъ
اساس قصر جلال تو بسکه هست رفیع
Ҷуз эзадаш натавон буд дайгарии меъмор
جز ایزدش نتوان بود دیگری معمار
Шҳо , ба мадҳу санои ту тоири табъам
شها، به مدح و ثنای تو طایر طبعم
Чу мурғакӣаст ки аз баҳр тар кунад минқор
چو مرغکی است که از بحر تر کند منقار
Маро чу мадҳу сано дар хури ҷалол ту нест
مرا چو مدح و ثنا در خور جلال تو نیست
Пас аз санои зи сано , май намоями истиғфор
پس از ثنا ز ثنا، می نمایم استغفار
Вале ба мадҳи ту чун зоти ман буд маҷбур
ولی به مدح تو چون ذات من بود مجبور
Аз ин қабили сухани сар аз ӯ занад ночор
از این قبیل سخن سر از او زند ناچار
Чунонкӣ аз паии таҷдиди матлаъии дигар
چنانکه از پی تجدید مطلعی دیگر
Забон чу шуъла ӣ теғ ту гашта оташбор
زبان چو شعله ی تیغ تو گشته آتشبار