Он зулфи сияҳ ки дилрабо шуд

آن زلف سیه که دلربا شد

Дар ишқи балои ҷон мо шуд

در عشق بلای جان ما شد

Дар сояи сарви истода

در سایه سرو ایستاده

Бенанд ки сарв чун ду то шуд

بینند که سرو چون دو تا شد

Аз шодӣ даҳр гашта озод

از شادی دهر گشته آزاد

То дил ба ғами ту мубтало шуд

تا دل به غم تو مبتلا شد

Ошиқ чаҳ равад ба каъбаи имрӯз

عاشق چه رود به کعبه امروز

Дар кӯии ту Марвро сафо шуд

در کوی تو مرو را صفا شد

Бегона шавад зи хеш эй дӯст

بیگانه شود ز خویش ای دوست

Бо дарди ту ҳар ки ошно шуд

با درد تو هر که آشنا شد

Аз шавқи ду абрӯят ба миҳроб

از شوق دو ابرویت به محراب

Умрами ҳамаи сарф дар дуо шуд

عمرم همه صرف در دعا شد

Сӯфӣ ба умеди он ки рӯзӣ

صوفی به امید آن که روزی

Дар кӯии ту раҳи барад гадо шуд

در کوی تو ره برد گدا شد