зи қад чун алифи сими он латифи ғизол

ز قد چون الف سیم آن لطیف غزال

Фироқам омад ва шуд қади ман чу заррини дол

فراقم آمد و شد قد من چو زرین دال

Бдоли заррини симини алифи бмни бФрўхт

بدال زرین سیمین الف بمن بفروخت

Миёни долу алиф зонка нест рӯй висол

میان دال و الف زانکه نیست روی وصال

Бидон умед ки байнами хаёл ӯ дар хоб

بدان امید که بینم خیال او در خواب

Нишондам аз сари мижгони ббоғи хоби ниҳол

نشاندم از سر مژگان بباغ خواب نهال

Ниҳоли хобу умед аз хаёл бибаредам

نهال خواب و امید از خیال ببریدم

Чунон шудам ки надонист каси марои зи хаёл

چنان شدم که ندانست کس مرا ز خیال

Хушаст ҳол касе каз хаёл ҳоле дошт

خوش است حال کسی کز خیال حالی داشت

Агар чаҳ зуд заволасту икдмсти он ҳол

اگر چه زود زوالست و یکدمست آن حال

Бҳсби ҳолами мнҷиик трмдӣ гуфта аст

بحسب حالم منجییک ترمدی گفته است

Ки аз тахаллуси мадҳи муаййидин ҷамол

که از تخلص مدح مؤیدین جمال

Ҷамоли маҳфили озодкони муаййиди дайн

جمال محفل آزادکان مؤید دین

Ки ҳаст чун падари хеш беназиру ҳам?ил

که هست چون پدر خویش بی نظیر و همال

Ҷамол ӯст бгитӣ чу кимиё ноёб

جمال اوست بگیتی چو کیمیا نایاب

Бълму ҳикмати вуҷӯду муруввату аФзол

بعلم و حکمت وجود و مروت و افضال

з ҷӯад ӯст Карими тай аз шумори лӣом

ز جود اوست کریم طی از شمار لئام

з илм ӯст Флотўни зи ҷумлаи ҷҳол

ز علم اوست فلاطون ز جمله جهال

Чунонкӣ бошад сифлаи бҷмъи моли ҳарис

چنانکه باشد سفله بجمع مال حریص

Аз он ҳаристараст ӯ бхрҷ кардани мол

از آن حریصتر است او بخرج کردن مال

Надид чашм кам ва беш дидагони ҷаҳон

ندید چشم کم و بیش دیدگان جهان

Чунуи зи халқи ҷаҳон беш дониш ва кам сол

چنو ز خلق جهان بیش دانش و کم سال

Чу дид соил ӯ сояи муборак ӯ

چو دید سائل او سایه مبارک او

з давр гуяд инак эй фаррухи фол

ز دور گوید اینک همای فرخ فال

зи дасти фаррухи фолаши зар дуруст шавад

ز دست فرخ فالش زر درست شود

Агар бкисаҳи соил наад шикастаи суфол

اگر بکیسه سائل نهد شکسته سفال

Зиҳии шикастаи сахои ту бухлро гардан

زهی شکسته سخای تو بخل را گردن

Хҳии зи ҳиммати ту ҷӯади брФрохтаҳи бол

خهی ز همت تو جود برفراخته بال

Кам аз ҷӯйаст бмизони ҳалами ту ҷўдӣ

کم از جویست بمیزان حلم تو جودی

Агар бкФаҳи дарози ҳалами ту буд мисқол

اگر بکفه دراز حلم تو بود مثقال

Агар бигирад даҷоли вори бухли ҷаҳон

اگر بگیرد دجال وار بخل جهان

Буд сахоат чу исои кушандаи даҷол

بود سخات چو عیسی کشنده دجال

Бмдҳти ту сухан парваранд аҳли сухан

بمدحت تو سخن پرورند اهل سخن

Ки прўрндаҳи эшон тўӣии бнФъу манол

که پرورنده ایشان توئی بنفع و منال

Баҳри макон ки сухани парварии ниҳоди қадам

بهر مکان که سخن پروری نهاد قدم

Дар он макон наравад ҷузи маноқиби ту мақол

در آن مکان نرود جز مناقب تو مقال

Чу шуд забони қалами тира аз даҳони дуот

چو شد زبان قلم تیره از دهان دوات

Бнўри хотир бар ту шавам мдиҳи сгол

بنور خاطر بر تو شوم مدیح سگال

Бшъри ман на ҳамоно гумони барӣ ки буд

بشعر من نه همانا گمان بری که بود

зи ҷои дигари мнҳўл қабл кардау қол

ز جای دیگر منحول قبل کرده و قال

Мисоли шоири мнҳўл агар буд анин

مثال شاعر منحول اگر بود عنین

Хабар надорад анин зи лиззати инзол

خبر ندارد عنین ز لذت انزال

Фасеҳ бошад мнҳўл агар буқати адо

فصیح باشد منحول اگر بوقت ادا

Ҳамон фасеҳ шавад гоҳи ҳасби гуфтани лол

همان فصیح شود گاه حسب گفتن لال

Аз он чаҳ ба ки бнздик чун ту мамдуҳӣ

از آن چه به که بنزدیک چون تو ممدوحی

зи табъи хеши намояди ҳакими саҳари ҳалол

ز طبع خویش نماید حکیم سحر حلال

Муллоам набаст бмнҳўлгар бар аз раҳи шеър

ملام نبست بمنحول گر بر از ره شعر

Ки чун ту ноед ммдўҳх бемуллоаму малол

که چون تو ناید ممدوحخ بی ملام و ملال

з шеър созад фаслӣ ва ҳар куҷо ки расад

ز شعر سازد فصلی و هر کجا که رسد

Ҳамин бихонад ва инаст одати Фзол

همین بخواند و اینست عادت فضال

Маро чу мадҳ ту хондам суол ҳоҷат нест

مرا چو مدح تو خواندم سئوال حاجت نیست

Ки бесуол кунад ҷӯади ту бмни аисол

که بی سئوال کند جود تو بمن ایصال

Ҳамеша то ки баҳри сол дар ҳисоби шҳўр

همیشه تا که بهر سال در حساب شهور

Се моҳи давр буд зи аввали раҷаби шавол

سه ماه دور بود ز اول رجب شوال

Чу рӯзи аввал шавол хоҳамат ҳамаи умр

چو روز اول شوال خواهمت همه عمر

Бшодмонӣ дар ъзу давлату иқбол

بشادمانی در عز و دولت و اقبال

Маи раҷаб ки раседаст бар ту фаррухи бод

مه رجب که رسید است بر تو فرخ باد

Ки ҳаст фаррухи айёмашу хуҷастаи лёл

که هست فرخ ایامش و خجسته لیال