Сайёдро нигар ки чаҳ бедод ме кунад

صیاد را نگر که چه بیداد می‌کند

На мекашад марои вена озод ме кунад

نه می‌کشد مرا ونه آزاد می‌کند

Бингар ки ёри хотири мо шод ме кунад

بنگر که یار خاطر ما شاد می‌کند

Бо ғайр ҳам нишину маро ёд ме кунад

با غیر هم‌نشین و مرا یاد می‌کند

Мурғи дилам ки ин ҳама фарёд ме кунад

مرغ دلم که این همه فریاد می‌کند

Фарёд аз тағофул сайёд ме кунад

فریاد از تغافل صیاد می‌کند

Хуши нағмаи булбулони чаманро чаҳ шуд ки зоғ

خوش نغمه بلبلان چمن را چه شد که زاغ

Бар шох гул нишаста ва фарёд ме кунад

بر شاخ گل نشسته و فریاد می‌کند

Бар мо равои мадори ситам беш аз ин ки дил

بر ما روا مدار ستم بیش از این که دل

То кӣ магари таҳаммул бедод мекунад ?

تا کی مگر تحمل بیداد می‌کند؟

Ман содаи лавҳу дилбари ошиқи фиреби ман

من ساده‌لوح و دلبر عاشق‌فریبِ من

Ҳрдм ба ваъдае дили ман шод ме кунад

هردم به وعده‌ای دل من شاد می‌کند

Он бе вафои табиб ки зикраш ба хайри бод

آن بی‌وفا طبیب که ذکرش به خیر باد

Донистае ки ҳеҷ туро ёд ме кунад

دانسته‌ای که هیچ ترا یاد می‌کند