Дорам назарӣ бо гули кӯ рӯй туро монад

دارم نظری با گل کو روی ترا ماند

Бо моҳи навам ишқӣаст кобрўӣ туро монад

با ماه نوم عشقی است کابروی ترا ماند

Меҳрии сет ба хуршедами кӯи ҳамчу рахт бошад

مهری‌ست به خورشیدم کو همچو رخت باشد

Ошуфтаам аз сунбули кӯи мӯӣ туро монад

آشفته‌ام از سنبل کو موی ترا ماند

Бо лола аз онам хуши кӯи ранги ту ёди орад

با لاله از آنم خوش کو رنگ تو یاد آرد

Аз накҳати гули мастами кӯи буи туро монад

از نکهت گل مستم کو بوی ترا ماند

Бар наргиси ин гулшан зон рӯи нигаронами ман

بر نرگس این گلشن زان رو نگرانم من

Кӯи чашми сияҳи масти ҷодӯӣ туро монад

کو چشم سیه‌مست جادوی ترا ماند

Бо сарви равонами ёри пайваста дар ин гулзор

با سرو روانم یار پیوسته در این گلزار

Кӯи қомати раъноу дилҷӯй туро монад

کو قامت رعنا و دلجوی ترا ماند

Гаштӣ ба табиби хеш чун гарми итоби хашм

گشتی به طبیب خویش چون گرم عتاب خشم

Дар оташ аз он сӯзади кӯи хуй туро монад

در آتش از آن سوزد کو خوی ترا ماند