Ки гуяд ҷузи ойӣна бар рӯй ту ?
که گوید جز آیینه بر روی تو؟
Ки болой чашмаст абрӯии ту !
که بالای چشم است ابروی تو!
Диҳад буии ҷамъияти мурғи дил
دهد بوی جمعیت مرغ دل
Парешонеи сунбули мӯии ту
پریشانی سنبل موی تو
Санавбари қадонро дар оради зи пой
صنوبر قدان را در آرد ز پای
Хиромидани сарви дилҷӯии ту
خرامیدن سرو دلجوی تو
Ба субҳи азали гашт дар таври ҳасан
به صبح ازل گشت در طور حسن
Таҷаллӣ , назар карда рӯй ту
تجلی، نظر کرده روی تو
Ба ҷои арақ , дар мақоми ҳаё
به جای عرق، در مقام حیا
Сафо метаровад з ҳар мӯии ту
صفا می تراود ز هر موی تو
Нигоҳат дар бихўдӣ ме занад
نگاهت در بیخودی می زند
Ба майхонаи чашми ҷодӯии ту
به میخانه چشم جادوی تو
Кунад ҳар хасӣ , кори сад мӯҳтасиб
کند هر خسی،کار صد محتسب
Чу тғро буд маст дар кӯии ту
چو طغرا بود مست در کوی تو