Соқӣ бидиҳ ҷом май равнақ гулзор шуд

ساقی بده جام می رونق گلزار شد

Чанг бизан мтрбои чашми басӣ тор шуд

چنگ بزن مطربا چشم بسی تار شد

Ҳай ту барор аз ҳарами духтари рузро ба боғ

هی تو برآر از حرم دختر رز را به باغ

Чист таъаммул буд гул ба сар хор шуд !

چیست تأمل بود گل به سر خار شد!

Ҳаии ту ба тори рубоби нохуни мизроби зан

هی تو به تار رباب ناخن مضراب زن

Гӯш ба ҳар пардаи тоби айш ба як бор шуд

گوش به هر پرده تاب عیش به یک بار شد

Хез ки омад баҳори вақт гуласт ва ҳазор

خیز که آمد بهار وقت گل است و هزار

Саҳни чамани зини шиори табла аттор шуд

صحن چمن زین شعار طبله عطار شد

Слслу Кебеку тзрўи нағмаи сарои зери сарв

صلصل و کبک و تذرو نغمه‌سرا زیر سرو

Бар зибри шохи гули булбула сор шуд

بر زبر شاخ گل بلبله سار شد

Фохтау андалеби тӯтӣу тоўсу зоғ

فاخته و عندلیب طوطی و طاوس و زاغ

Баҳри тамошо ба боғ бар сар девор шуд

بهر تماشا به باغ بر سر دیوار شد

Гул ба чамани ҷомаро карда зи мастии қабо

گل به چمن جامه را کرده ز مستی قبا

Аз май айшаши сабуи гӯйии ту саршор шуд

از می عیشش سبو گویی تو سرشار شد

Ғунча даҳан карда во ханда зада бе або

غنچه دهن کرده وا خنده زده بی‌ابا

Навбаташ аз бе худии як ду се такрор шуд

نوبتش از بی‌خودی یک دو سه تکرار شد

Булбули бедили шинави мадҳи гул аз « гулшанӣ »

بلبل بیدل شنو مدح گل از «گلشنی»

Каши зи хиромаши чамани гулшан ашъор шуд

کش ز خرامش چمن گلشن اشعار شد

Бонии қасри сухани Монии нақши змн

بانی قصر سخن مانی نقش زمن

Гавҳар ва дар адан аз суханаш хор шуд

گوهر و در عدن از سخنش خوار شد

Онкӣ ба чавгони назми гӯии зи саъдии барад

آنکه به چوگان نظم گوی ز سعدی برد

Вонкаҳ ба дониши азуи буъалӣ бекор шуд

وآنکه به دانش ازو بوعلی بیکار شد

Онкии зи роҳи сухани Фсҳти сҳбони шикаст

آنکه ز راه سخن فصحت صحبان شکست

Вонкаҳ ба ҳисони марои нисбат ӯ ор шуд

وآنکه به حسان مرا نسبت او عار شد

Мӯии шикофад ба назм гӯй сетанд ба азм

موی شکافد به نظم گوی ستاند به عزم

Ҳарчӣ ки ӯ кард ҷузами лؤлؤӣ шҳўор шуд

هرچه که او کرد جزم لؤلؤی شهوار شد

Онкӣ ба фазлу камол таъна занад бо камол

آنکه به فضل و کمال طعنه زند با کمال

Вонкаҳ ба ҷӯад ва навол марҳамат эсор шуд

وآنکه به جود و نوال مرحمت ایثار شد

Баҳр ба пеши дилаши рехта буд аз сароб

بحر به پیش دلش ریخته بود از سراب

Абр ба назд кафши омада бемор шуд

ابر به نزد کفش آمده بیمار شد

Аз қалами мшкбор ҳарчӣ ки бинвишт ӯ

از قلم مشکبار هرچه که بنوشت او

Бар сари набзи хирад лек чу тӯмор шуд

بر سر نبض خرد لیک چو طومار شد

Субҳ ки аз содиқӣ дам зада бар сади шарқ

صبح که از صادقی دم زده بر سد شرق

Аз дами субҳи дамаши дам ба дам нор шуд

از دم صبح دمش دم به دم نار شد

Хоки Самарқандро таъна сазад бар фалак

خاک سمرقند را طعنه سزد بر فلک

Каш ба сар ӯ туро шева рафтор шуд !

کش به سر او تو را شیوه رفتار شد!

эй ба ҳамаи илми як зомднти хўшдлм

ای به همه علم یک زآمدنت خوشدلم

Аз чаҳ фаромӯши ту силсила пор шуд ? !

از چه فراموش تو سلسله پار شد؟!

эй ки напурсӣ марои омада дар кулба ам

ای که نپرسی مرا آمده در کلبه‌ام

Дидаи ман зи интизор дар раҳи ту чор шуд

دیده من ز انتظار در ره تو چار شد

Гӯш ба арзами намои байн ки чаҳ гӯям ту ро

گوش به عرضم نما بین که چه گویم تو را

Кулбаи аҳзони ман бар рухи ту зор шуд !

کلبه احزان من بر رخ تو زار شد!

Туғрул ошуфтаам мадҳи туро ме кунам

طغرل آشفته‌ام مدح تو را می‌کنم

Халъати меҳмонии ?ути зода афкор шуд !

خلعت مهمانی‌ات زاده افکار شد!