Боз аз ранг ҳино шуд панҷаи дилдори сурх

باز از رنگ حنا شد پنجه دلدار سرخ

Ранги домон шафақ омад кунун пайкори сурх

رنگ دامان شفق آمد کنون پیکار سرخ

Олимӣ дорад хаёли захми теғи абрӯяш

عالمی دارد خیال زخم تیغ ابرویش

Кош аз хӯнам буд он теғи ҷавҳардори сурх !

کاش از خونم بود آن تیغ جوهردار سرخ!

Ҳркҷогар нағмаи зеру Бами лаълаш буд

هرکجا گر نغمه زیر و بم لعلش بود

Нохун мутриб шавад аз пардаи он тори сурх

ناخن مطرب شود از پرده آن تار سرخ

Сӯй мо дорад хироми он рашки гулзори Ирам

سوی ما دارد خرام آن رشک گلزار ارم

Гулшани моро буд имрӯзи баргу бори сурх

گلشن ما را بود امروز برگ و بار سرخ

Сабзаи лаълаш буд акнӯн бароти зиндагӣ

سبزه لعلش بود اکنون برات زندگی

Оҳи азони рӯзӣ ки пӯшади он парии рухсори сурх !

آه ازآن روزی که پوشد آن پری‌رخسار سرخ!

эй ки дории орзӯии Машҳади ушшоқ ӯ

ای که داری آرزوی مشهد عشاق او

наме тавон кардани гулӯии хешро ночори сурх

می‌توان کردن گلوی خویش را ناچار سرخ

Мо шаҳидонро буд ин хирқаи хунини илм

ما شهیدان را بود این خرقه خونین علم

Зоҳидиро гарчи бошад аз таассуби ори сурх

زاهدان را گرچه باشد از تعصب عار سرخ

Гар набошад имтиёзи даъвии ботили зи ҳақ

گر نباشد امتیاز دعوی باطل ز حق

Кӣ шавад аз хӯни сад ҳаллоҷи чӯби дори сурх ? !

کی شود از خون صد حلاج چوب دار سرخ؟!

Он қадр аз дида бо ёди Рахши хӯни рехтам

آنقدر از دیده با یاد رخش خون ریختم

Чеҳра ам гардӣда аз ашки надомати бори сурх

چهره‌ام گردیده از اشک ندامت‌بار سرخ

эй хуши он мисра ки туғрул месарояд бедилӣ

ای خوش آن مصرع که طغرل می‌سراید بیدلی

Ҷомаи ?ути зин хам намеояд буруни ҳрбори сурх !

جامه‌ات زین خم نمی‌آید برون هربار سرخ!