Гар ба арзи оради таманнои ҳасрати ноком ро
گر به عرض آرد تمنا حسرت ناکام را
Шухӣ матлаб шавад хамёзаи мавҷи ҷом ро
شوخی مطلب شود خمیازه موج جام را
Шавқи бсмли дам ба дам аз беқарориҳои мо
شوق بسمل دم به دم از بیقراریهای ما
намекашад як сар дар оғӯши тапиши ором ро
میکشد یک سر در آغوش تپش آرام را
Шӯҳрати кони ақиқ аз ҳастӣ мо шуд адам
شهرت کان عقیق از هستی ما شد عدم
Каз нигини мо шунидан нест ҳаргизи ном ро
کز نگین ما شنیدن نیست هرگز نام را
Матлаб ноёбро шуд хонаи анқои ватан
مطلب نایاب را شد خانه عنقا وطن
То куҷои ҷавлони намоеи тавсани авҳомро ? !
تا کجا جولان نمایی توسن اوهام را؟!
Дар дилами сози Баму зери ҷунуни яксон буд
در دلم ساز بم و زیر جنون یکسان بود
Имтиёзӣ нест дар ойӣна аз дар бом ро
امتیازی نیست در آیینه از در بام را
Ҳар замони азми ҳариму тўФ кӯяш ме кунам
هر زمان عزم حریم و طوف کویش میکنم
Бастаам аз рафтани дили сӯй ӯ эҳром ро
بستهام از رفتن دل سوی او احرام را
Муҳаррам розӣ намеёбам дарин бозори даҳр
محرم رازی نمییابم درین بازار دهر
Кист аз мо то расонади сӯй ӯ пайғомро ? !
کیست از ما تا رساند سوی او پیغام را؟!
Имшаби он бадари мунир аз хона берун шуд магар ? !
امشب آن بدر منیر از خانه بیرون شد مگر؟!
зи аввали шаб то саҳари бинии ту моҳи томро !
ز اول شب تا سحر بینی تو ماه تام را!
Чашми пӯш аз рӯй ӯ бошад димоғатро халал
چشم پوش از روی او باشد دماغت را خلل
намерасад ҳрдми зиён аз равшании сарсомро !
میرسد هردم زیان از روشنی سرسام را!
Пухтагон меҳр баргиранд аз нахли мурод
پختگان مهر برگیرند از نخل مراد
Лиззатӣ набӯд ба дандони миваҳои хомро !
لذتی نبود به دندان میوههای خام را!
эй гадо акнӯн зи чини абрӯии дунони гузар
ای گدا اکنون ز چین ابروی دونان گذر
То куҷо хоҳӣ кашӣдан миннати ибромро ? !
تا کجا خواهی کشیدن منت ابرام را؟!
Шаби равони дил ба шаҳристони зулфаш май раванд
شبروان دل به شهرستان زلفش میروند
Кӣ буд фикри асаси риндони дрдошомро ? !
کی بود فکر عسس رندان دُردآشام را؟!
Аз тапиши туғрули диламро изтиробӣ кам нашуд
از تپش طغرل دلم را اضطرابی کم نشد
Дар қафас ором набӯд сайди ваҳшати ромро !
در قفس آرام نبود صید وحشت رام را!