Ишқро ҳасани ту қонӯн дигар пайдо кунад

عشق را حسن تو قانون دگر پیدا کند

Вомиқ аз меҳри ту тарки пеша узро кунад

وامق از مهر تو ترک پیشه عذرا کند

Булбулу қамарӣ ба боғ аз ҳасрати қаду рахт

بلبل و قمری به باغ از حسرت قد و رخت

Он яке куку занад ва он дайгарӣ ово кунад !

آن یکی کوکو زند و آن دیگری آوا کند!

эй маи хубони зи ишқати Зуҳра саргарм навост

ای مه خوبان ز عشقت زهره سرگرم نواست

Бар фалаки калаки Уториди васфи ту иншо кунад !

بر فلک کلک عطارد وصف تو انشا کند!

Дар чамани сунбули зи хиҷлати сари фурӯди орад ба пеш

در چمن سنبل ز خجلت سر فرود آرد به پیش

Гар сабои афсонаи он зулф ънбрсо кунад

گر صبا افسانه آن زلف عنبرسا کند

Лмъаҳ эй ҳасани туро бинад Зулайхогар ба хоб

لمعه‌ای حسن تو را بیند زلیخا گر به خواب

Аз надомат бар сари Юсуфи басӣ ғавғо кунад

از ندامت بر سر یوسف بسی غوغا کند

Гар ба гӯши боғбони афсона рӯят расад

گر به گوش باغبان افسانه رویت رسد

То қиёмат кӣ дилаши майли гул раъно кунад ? !

تا قیامت کی دلش میل گل رعنا کند؟!

Рахт ҳастӣ брнҳм бар маҳмили роҳи фано

رخت هستی برنهم بر محمل راه فنا

Гар рақиб бесаодат дар бар рӯ ҷо кунад !

گر رقیب بی‌سعادت در بر رو جا کند!

Як шаб аз роҳи карам эй шӯхи сӯии ман биё

یک شب از راه کرم ای شوخ سوی من بیا

То нигоҳам дар бисоти оризат мأўо кунад

تا نگاهم در بساط عارضت مأوا کند

Масти саҳбои висолат гар шавад туғрул чаҳ бок ? !

مست صهبای وصالت گر شود طغرل چه باک؟!

Як қалами малики ду оламро ба пушт по кунад !

یک قلم ملک دو عالم را به پشت پا کند!