Анбари зулфи кажати бозори анбари бишиканад
عنبر زلف کژت بازار عنبر بشکند
Қимати лаъли лабати савдои гавҳари бишиканад
قیمت لعل لبت سودای گوهر بشکند
Бо қади шамшоди сӯии боғгар ореи гузар
با قد شمشاد سوی باغ گر آری گذر
ЗонФъоли қоматати шохи санавбари бишиканад
زانفعال قامتت شاخ صنوبر بشکند
Дар раҳ ишқат шудам хок ва вале тарсам аз он
در ره عشقت شدم خاک و ولی ترسم از آن
Каз ғубори ман туро наъли ткоўри бишиканад
کز غبار من تو را نعل تکاور بشکند
Алҳзр аз фитнаи иأҷўҷи чашми соҳират
الحذر از فتنه یأجوج چشم ساحرت
Охири ин хайли балои сади Сикандари бишиканад !
آخر این خیل بلا سد سکندر بشکند!
Лаъли худгар вокнӣ чун ғунчаи ҳангоми сухан
لعل خود گر واکنی چون غنچه هنگام سخن
Аз табассумҳои лаълати нархи шукри бишиканад
از تبسمهای لعلت نرخ شکر بشکند
Ҳайрати ойӣна аз акси рух зебоӣ туаст
حیرت آیینه از عکس رخ زیبای توست
Аз арақи ҳрдм ба рӯй хеши ҷавҳари бишиканад
از عرق هردم به روی خویش جوهر بشکند
Мади абрӯии ту дар тороҷ дил монад ба онк
مد ابروی تو در تاراج دل ماند به آنک
Зулфиқори Муртазои девори хайбари бишиканад
ذوالفقار مرتضی دیوار خیبر بشکند
Як шабии сармасти саҳбои висол хеш кун
یک شبی سرمست صهبای وصال خویش کن
Гар шикастии ин сухани дили ҳам баробари бишиканад
گر شکستی این سخن دل هم برابر بشکند
Дорам андари дили ҳавои ишқат эй нозофарин
دارم اندر دل هوای عشقت ای نازآفرین
Ин хумори ман кӣ аз ҳар ҷому соғари бишиканад ? !
این خمار من کی از هر جام و ساغر بشکند؟!
Чун рӯми сӯят вале аз санги борони рақиб
چون روم سویت ولی از سنگباران رقیب
То ҳарими васли ту сдҷои марои сари бишиканад !
تا حریم وصل تو صدجا مرا سر بشکند!
Ангабинат таъна созад бо шароби слсбил
انگبینت طعنه سازد با شراب سلسبیل
Наргис бе боки мастати қадари абҳри бишиканад
نرگس بیباک مستت قدر ابحر بشکند
Номи ту то бар сар ҳар байти туғрул тоҷ шуд
نام تو تا بر سر هر بیت طغرل تاج شد
Аз хиҷолати афсари фағфуру қайсари бишиканад
از خجالت افسر فغفور و قیصر بشکند