Биё эй дил ки найрангу фусунати пар ба кор ояд
بیا ای دل که نیرنگ و فسونت پر به کار آید
зи чашмаши соғари андешаро ранг хумор ояд
ز چشمش ساغر اندیشه را رنگ خمار آید
зи даври печу тоби оташи дили ашки гулгунам
ز دور پیچ و تاب آتش دل اشک گلگونم
Ба ёди пои бӯсаши ҳамчуи Тифл нисўор ояд
به یاد پایبوسش همچو طفل نیسوار آید
Наме бахшам ба ғамҳои фироқаши рӯзи шодӣ ро
نمیبخشم به غمهای فراقش روز شادی را
Ки ногуҳи як шабии ёди висолаш дар канор ояд
که ناگه یک شبی یاد وصالش در کنار آید
зи ҷӯши сабза лаълат шуд оҳи бедилони афзӯн
ز جوش سبزه لعلت شد آه بیدلان افزون
Ки булбул дар чамани ҳангоми фасл навбаҳор ояд
که بلبل در چمن هنگام فصل نوبهار آید
Даҳонашро ки Аслан нест имкони вуҷӯд ӯ
دهانش را که اصلا نیست امکان وجود او
Агар ваҳмат чу анқо бар сари шох чанор ояд
اگر وهمت چو عنقا بر سر شاخ چنار آید
Сафои оризу гулгунии рухсор ӯ бо ҳам
صفای عارض و گلگونی رخسار او با هم
Чу ранги сурхии барфӣ ки аз об анор ояд
چو رنگ سرخی برفی که از آب انار آید
Бароти сарнавишти мост аз эъҷози ёқӯтӣ
برات سرنوشت ماست از اعجاز یاقوتی
Ки ҳамчун ҷомаи хунини шаҳидатро ба кор ояд
که همچون جامه خونین شهیدت را به کار آید
Шаби ялдои ҳиҷратро агар чаҳ нест поёнӣ
شب یلدای هجرت را اگر چه نیست پایانی
Бидон умед хурсандам ки дар рӯз шумор ояд
بدان امید خرسندم که در روز شمار آید
Расад буии висолат дар димоғами зи изтироби дил
رسد بوی وصالت در دماغم ز اضطراب دل
Куҷои имшаби марои хобӣ ба чашм интизор ояд ? !
کجا امشب مرا خوابی به چشم انتظار آید؟!
Чаҳ хуш гуфтаст туғрули ҳазрати баҳри сухани бедил
چه خوش گفتهست طغرل حضرت بحر سخن بیدل
Тугар ое тараб ояд биҳишт ояд баҳор ояд !
تو گر آیی طرب آید بهشت آید بهار آید!