эй хироми нози ту чун ҷилваи товуси нар

ای خرام ناز تو چون جلوه طاووس نر

Тоӣри назораро андари ҳавояти болу пар

طائر نظاره را اندر هوایت بال و پر

Гарчи шуд маҳв аз сиришками нусхаҳои ғам вале

گرچه شد محو از سرشکم نسخه‌های غم ولی

Гашта бар лавҳи дилами хати ту нақши колҳҷр

گشته بر لوح دلم خط تو نقش کالحجر

Ҷуз ба фармон ту набӯд ранг нофармонем

جز به فرمان تو نبود رنگ نافرمانیم

Бушковадгар аз лаби дарёии ашками нилӯфар

بشکفد گر از لب دریای اشکم نیلوفر

Дар китоби ғами варақи гирдоне айём нест

در کتاب غم ورق گردانی ایام نیست

Кӣ расад дар хотири маҷнӯни ғами шому саҳар ? !

کی رسد در خاطر مجنون غم شام و سحر؟!

Ошиқ он бошад ки ҳрсўи дидаи худ во кунад

عاشق آن باشد که هرسو دیده خود وا کند

Сӯрати ёраш буд чун мардумаки мади назар

صورت یارش بود چون مردمک مد نظر

Нест дар ҷӯши талотуми нохудои ғайр аз худо

نیست در جوش تلاطم ناخدا غیر از خدا

Киштии мо гар фитад садбор дар мавҷи хатар

کشتی ما گر فتد صدبار در موج خطر

Аз арақи тамҳид гавҳар кардаам то карда ам

از عرق تمهید گوهر کرده‌ام تا کرده‌ام

Орзӯии меҳр ӯ аз шабнами ин чашм тар

آرزوی مهر او از شبنم این چشم تر

Дар паии шаҳди висолаши з ҳар ҳиҷрон тавъам аст

در پی شهد وصالش ز هر هجران توأم است

Ангабинаши бас ки ҷой нӯш дорад нештар

انگبینش بس که جای نوش دارد نیشتر

Бас ки дорад гӯш ӯ бо нолаи ман улфатӣ

بس که دارد گوش او با ناله من الفتی

Ҳар қадар кам бошад афғонами ҷафояши бештар

هر قدر کم باشد افغانم جفایش بیشتر

Нест аз боғи таманнои ҳосилии сомони ман

نیست از باغ تمنا حاصلی سامان من

Оқибати нахл муродам дод навмидии самар

عاقبت نخل مرادم داد نومیدی ثمر

Фаҳм кун аз шарҳи тамкини бас ки дарси хомӯшӣ

فهم کن از شرح تمکین بس که درس خاموشی

Маънӣ Эй дорад ки ҳаргиз нашунӯд ҷузи гӯши кар

معنی‌ای دارد که هرگز نشنود جز گوش کر

Беди маҷнӯн кӣ шавад аз тарбият чун норван ? !

بید مجنون کی شود از تربیت چون نارون؟!

Табъ мавзун нест Аслан бо кас аз ирси падар

طبع موزون نیست اصلا با کس از ارث پدر

Ҳбзо аз мисраи бедил ки туғрул гуфта аст

حبذا از مصرع بیدل که طغرل گفته است

Дар гиребони таъаммули қатра ҳо дорад гуҳар

در گریبان تأمل قطره‌ها دارد گهر