Шаб ки бо ёд рахт дошт дилами сӯзу гудоз

شب که با یاد رخت داشت دلم سوز و گداز

Барқи оҳам ба такопуӣ ту шуд дар так ва тоз

برق آهم به تکاپوی تو شد در تک و تاز

Ҳушам аз сар ба хаёли сари зулф ту бирафт

هوشم از سر به خیال سر زلف تو برفت

Ҳамчуи Мӯсои тарафи таври давон аз паии роз

همچو موسی طرف طور دوان از پی راز

Сонеъи рӯзи азалро ту чаҳ хуши маснӯъӣ

صانع روز ازل را تو چه خوش مصنوعی

Ки ба акси ту буд ойӣнаро рӯй ниёз !

که به عکس تو بود آیینه را روی نیاز!

Лаъибатонро равиши пардаи афсун як мӯаст

لعبتان را روش پرده افسون یک موست

Карда зеру Бами ишқи ту марои лаъибати боз

کرده زیر و بم عشق تو مرا لعبت باز

Чун ба ҳангоми хиромии ту ба гулгашти чаман

چون به هنگام خرامی تو به گلگشت چمن

Чашми наргис ба тамошои ҷамолат шудаи боз

چشم نرگس به تماشای جمالت شده باز

Масти саҳбои ҷамолӣ ва ба худ май нозӣ

مست صهبای جمالی و به خود می‌نازی

ё магари калаки қазои бастаи асоси ту зи ноз ? !

یا مگر کلک قضا بسته اساس تو ز ناز؟!

Мурғи дили бас ки ба тири нигаҳат муътод аст

مرغ دل بس که به تیر نگهت معتاد است

Сарф ҳар сифла макун ҷониб туғрул андоз !

صرف هر سفله مکن جانب طغرل انداز!