Гарчи дар роҳи муҳаббат дар так ва тозам ҳануз

گرچه در راه محبت در تک و تازم هنوز

Нест мизробами буруни пардаи созам ҳануз

نیست مضرابم برون پرده سازم هنوز

Бас ки будам аз баҳори ҳасани гулчини вафо

بس که بودم از بهار حسن گلچین وفا

Аз шикасти буии гули ёбии ту овозам ҳануз

از شکست بوی گل یابی تو آوازم هنوز

Аз каманди ҷазбаи ишқаши раҳоӣ мушкил аст

از کمند جذبه عشقش رهایی مشکل است

Чун нигаҳ домӣаст шухиҳои парвозам ҳануз

چون نگه دامیست شوخی‌های پروازم هنوز

Нест озодии з зулфаш бошудам умри абад

نیست آزادی ز زلفش باشدم عمر ابد

Бехабар аз сарнавишти хати оғозам ҳануз

بی‌خبر از سرنوشت خط آغازم هنوز

Гар буд олами пар аз афсонаи ишқам вале

گر بود عالم پر از افسانه عشقم ولی

Шамае воқиф нашуд як одам аз розам ҳануз

شمه‌ای واقف نشد یک آدم از رازم هنوز

Гарчи набӯд ҳосилии ҷузи яъс аз васлаши маро

گرچه نبود حاصلی جز یأس از وصلش مرا

Беабоء ҳамчун нигаҳ ҳрсўӣ метозам ҳануз

بی‌اباء همچون نگه هرسوی می‌تازم هنوز

Сарбаландӣ шуд насибами оқибат аз пои дор

سربلندی شد نصیبم عاقبت از پای دار

Рояти Мансурам ва дар ишқи мумтозам ҳануз

رایت منصورم و در عشق ممتازم هنوز

Дар бисоти ишқ аз ҳиҷраш агар чаҳ шшдрм

در بساط عشق از هجرش اگر چه ششدرم

Донаҳои муҳра ин нарад май бозам ҳануз

دانه‌های مهره این نرد می‌بازم هنوز

Сӯрати мавҷи хироми ноз ӯ андари чаман

صورت موج خرام ناز او اندر چمن

Ҷилваи тиҳу буд дар дидаи бозам ҳануз

جلوه تیهو بود در دیده بازم هنوز

Шабнами осо сард шуд аз даҳри дасти тоқатам

شبنم‌آسا سرد شد از دهر دست طاقتم

Гармии меҳр ки дорад шухии нозам ҳануз ? !

گرمی مهر که دارد شوخی نازم هنوز؟!

Ғамзаҳои чашм ӯ шуд муҳаррами рози дилам

غمزه‌های چشم او شد محرم راز دلم

Зон сабаби ойӣнаи сон дар силки ғаммозам ҳануз

زان سبب آیینه‌سان در سلک غمازم هنوز

Кӣ ба озодӣ расад аз хӯни теғаши гарданам

کی به آزادی رسد از خون تیغش گردنم

Хештанро ҳар тараф чун бсмл андозам ҳануз !

خویشتن را هر طرف چون بسمل اندازم هنوز!

Нест як кас то кунад шерозаи ҷузви сухан

نیست یک کس تا کند شیرازه جزو سخن

Буии саъдӣ май дамад аз хоки Широзам ҳануз

بوی سعدی می‌دمد از خاک شیرازم هنوز

Ҳбзои туғрул ки мегуяд ҷаноби бедилӣ

حبذا طغرل که می‌گوید جناب بیدلی

Содаи лавҳон ришта мебанданд бар созам ҳануз

ساده‌لوحان رشته می‌بندند بر سازم هنوز