Офарини шасти хаданги чашми зиҳгири ту ро
آفرین شست خدنگ چشم زهگیر تو را
Каз ду сад дил бигузаранд новаки тири туро !
کز دو صد دل بگذراند ناوک تیر تو را!
Банди савдои ғами Юсуфи Зулайхо кӣ шудӣ
بند سودای غم یوسف زلیخا کی شدی
Гар бидидӣ печу тоби зулфи занҷири туро ? !
گر بدیدی پیچ و تاب زلف زنجیر تو را؟!
Рамзи сомони тағофули он қадр фаҳмида ам
رمز سامان تغافل آنقدر فهمیدهام
Карда устоди азал аз номи тахмири туро !
کرده استاد ازل از نام تخمیر تو را!
Ҷон кунад беҳзод аз роҳи таҳайюр то абад
جان کند بهزاد از راه تحیر تا ابد
Ҳркҷо бинад агар ӯ нақши тасвири туро !
هرکجا بیند اگر او نقش تصویر تو را!
Зери теғи абрӯят танҳо на ман ҷон май даҳум
زیر تیغ ابرویت تنها نه من جان میدهم
Кист ҷон худ насозад тӯҳфаи шамшери туро ? !
کیست جان خود نسازد تحفه شمشیر تو را؟!
Нест мумкини васфи ту эй тӯҳфаи оёти ҳасан
نیست ممکن وصف تو ای تحفه آیات حسن
Кас намедонад чаҳ хоҳад кард тафсири туро !
کس نمیداند چه خواهد کرد تفسیر تو را!
Бо қадат эй нахли гулзори баҳори дилбарӣ
با قدت ای نخل گلزار بهار دلبری
Рости гӯи пурсами ман аз майхона то пери туро !
راست گو پرسم من از میخانه تا پیر تو را!
Хонаи дилро иморат ҳо намӯдӣ аз ғамат
خانه دل را عمارتها نمودی از غمت
Ҳеҷ кас вайрон нахоҳад кард таъмири туро !
هیچ کس ویران نخواهد کرد تعمیر تو را!
Лаъли хубонро шукри талхии намояд бо лабат
لعل خوبان را شکر تلخی نماید با لبت
Модари даҳр аз шукри ҷӯшида то шери туро !
مادر دهر از شکر جوشیده تا شیر تو را!
Туғрул аз назмами саропои байн ки май резади шукр
طغرل از نظمم سراپا بین که میریزد شکر
Бас ки бинмудам зи сар то пои таҳрири туро !
بس که بنمودم ز سر تا پای تحریر تو را!