Арз ҳоҷат мекунад дили хусрави нози туро ,

عرض حاجت می‌کند دل خسرو ناز تو را،

Нест қонӯни муҳаббати пардаи сози туро !

نیست قانون محبت پرده ساز تو را!

Чун кабӯтари бсмли шавқ тапидан ме шавад

چون کبوتر بسمل شوق تپیدن می‌شود

Аз қазои ҳаркас ки бинад чашми шаҳбози ту ро

از قضا هرکس که بیند چشم شهباز تو را

Рамзи чашмати ин буд набӯд намӯдани баъди азин

رمز چشمت این بود نبود نمودن بعد ازین

Муҳаррами асрори худ он чашми ғаммози туро !

محرم اسرار خود آن چشم غماز تو را!

Дар фани эҳёи зи шарм аҷз нанишинад дигар

در فن احیا ز شرم عجز ننشیند دگر

Гар масеҳо башнавад ойини эъҷози туро !

گر مسیحا بشنود آیین اعجاز تو را!

Афканди қамарӣ ба гардани тавқи доғи бандагӣ

افکند قمری به گردن طوق داغ بندگی

Дар чаман бинад агар он сарви мумтози ту ро

در چمن بیند اگر آن سرو ممتاز تو را

Бе адаби тарсам ки бинад бугзарад аз чобукӣ

بی‌ادب ترسم که بیند بگذرد از چابکی

Тавсани умрам агар хинги сбктози туро !

توسن عمرم اگر خنگ سبکتاز تو را!

Дар маънӣ кардае туғрули ниҳон ҳамчун садаф

در معنی کرده‌ای طغرل نهان همچون صدف

Фош созад мавҷи ин дарёи магари рози туро ? !

فاش سازد موج این دریا مگر راز تو را؟!