Ҳаркии нӯшад аз қазогар ҷоми машҳуни ту ро

هرکه نوشد از قضا گر جام مشحون تو را

намекунад дарси адаби найранги афсуни ту ро

می‌کند درس ادب نیرنگ افسون تو را

Дар тариқи ишқи андари вусъати ободи ҷунун

در طریق عشق اندر وسعت‌آباد جنون

Нагзарад ғайр аз саманди ваҳми ҳомӯни туро !

نگذرد غیر از سمند وهم هامون تو را!

Сарви андари боғи сар дар пои шамшоди афканд

سرو اندر باغ سر در پای شمشاد افکند

Гар бибинад турраи гесуии вожўни туро !

گر ببیند طره گیسوی واژون تو را!

Шабнам хиҷлат шавад кӯҳи Бадахшон то абад

شبنم خجلت شود کوه بدخشان تا ابد

Башнавад васфи ҳадис лаъл мегаван туро !

بشنود وصف حدیث لعل میگون تو را!

Хомаи таҳрир аз чӯби санавбар боядам

خامه تحریر از چوب صنوبر بایدم

То ба арзи орми баландиҳои мазмуни туро !

تا به عرض آرم بلندی‌های مضمون تو را!

Ҳаркасӣ ноед ба зери пардаи мизроби ғам

هرکسی ناید به زیر پرده مضراب غم

Зеру Бам бисёр бошад сози қонӯни туро !

زیر و بم بسیار باشد ساز قانون تو را!

Аз фиреби наргиси мастат касе огоҳ нест

از فریب نرگس مستت کسی آگاه نیست

эй басои афсун ки бошад чашми мафтӯни туро !

ای بسا افسون که باشد چشم مفتون تو را!

Қуръаи фоли тараб ҳаргиз наомад аз қазо

قرعه فال طرب هرگز نآمد از قضا

Аз ҳуҷуми бахти бади ушшоқи маҳзуни туро !

از هجوم بخت بد عشاق محزون تو را!

Қомати тӯбо ба зери бори хиҷлати бишиканад

قامت طوبی به زیر بار خجلت بشکند

Дар чаман бинад хироми қади мавзуни туро !

در چمن بیند خرام قد موزون تو را!

Туғрул аз ҷон мекунад имрӯзи саррофи сухан

طغرل از جان می‌کند امروز صراف سخن

Ҳалқаи гӯши маъонӣ дар макнуни туро !

حلقه گوش معانی در مکنون تو را!