Дорад чамани зи равнақи фасли баҳори ранг

دارد چمن ز رونق فصل بهار رنگ

Ҳар барги гули гирифтаи магар аз ҳазор ранг ? !

هر برگ گل گرفته مگر از هزار رنگ؟!

Имрӯз дар бисоти гулистон ба фарши ноз

امروز در بساط گلستان به فرش ناز

Хобидааст шоҳиди гул дар канори ранг

خوابیده است شاهد گل در کنار رنگ

Монанди зоҳидии ту ба саҷҷодаи чаман

مانند زاهدان تو به سجاده چمن

Аз донаҳои сбҳаҳи шабнами шумори ранг

از دانه‌های سبحه شبنم شمار رنگ

Дорад ба боғи азми сафари корвони гул

دارد به باغ عزم سفر کاروان گل

Гуё ки меравад зи паии навбаҳори ранг

گویا که می‌رود ز پی نوبهار رنگ

Аз бас ки рехтам ба фироқаши сиришки ғам

از بس که ریختم به فراقش سرشک غم

Чашмами барад ба гиряи зи шамъи мазори ранг

چشمم برد به گریه ز شمع مزار رنگ

Назора кун ба боғ ки фурсат ғанимат аст

نظاره کن به باغ که فرصت غنیمت است

Аз бас ки гашта тавсани гулро савори ранг !

از بس که گشته توسن گل را سوار رنگ!

Бирнгӣаст ранги хами нилии фалак

بیرنگی است رنگ خم نیلی فلک

Гар нест бовари ту азин хам барор ранг !

گر نیست باور تو ازین خم برآر رنگ!

Гулро ба пеш рӯй ту сомон хиҷлат аст

گل را به پیش روی تو سامان خجلت است

Набӯд ба ҷузи арақ ба рухи шармсори ранг

نبود به جز عرق به رخ شرمسار رنگ

Туғрули нигар ки ҳазрати бедил чаҳ гуфта аст

طغرل نگر که حضرت بیدل چه گفته است

ӣнҷост бе бақои гул ва бе эътибори ранг !

اینجاست بی‌بقا گل و بی‌اعتبار رنگ!