Кош дар базми адаби ман дилбарӣ май доштам

کاش در بزم ادب من دلبری می‌داشتم

Пеши худ монанди минои соғарӣ май доштам

پیش خود مانند مینا ساغری می‌داشتم

Роятам аз ишқ ӯ май суди сари андари фалак

رایتم از عشق او می‌سود سر اندر فلک

Гар зи нақши хоки поиши афсарӣ май доштам !

گر ز نقش خاک پایش افسری می‌داشتم!

Сози қонӯни муҳаббати парда ишқам дарид

ساز قانون محبت پرده عشقم درید

Кош май ншнўдму гӯши карӣ май доштам

کاش می‌نشنودم و گوش کری می‌داشتم

намешудам ман сарбаланди саҷдаи нози адаб

می‌شدم من سربلند سجده ناز ادب

Чун суроҳеи хутба беминбарӣ май доштам

چون صراحی خطبه بی‌منبری می‌داشتم

Ҷузи гули матлаб наме чидами зи гулзори умед

جز گل مطلب نمی‌چیدم ز گلزار امید

Дар баҳори ин амали чашмтарӣ май доштам

در بهار این عمل چشم تری می‌داشتم

Сӯхтами парвонаи сон дар оташи доғи ғамаш

سوختم پروانه‌سان در آتش داغ غمش

намепаридам сӯй ӯ болу парӣ май доштам

می‌پریدم سوی او بال و پری می‌داشتم

Ҳамдами базми висолами ҷузи ғам Лайлӣ набӯд

همدم بزم وصالم جز غم لیلی نبود

Ҳамчуи маҷнӯнгар зи хорои бистарӣ май доштам !

همچو مجنون گر ز خارا بستری می‌داشتم!

Нусхаҳои ишқ ӯ аз бас ки бешероза буд

نسخه‌های عشق او از بس که بی‌شیرازه بود

наменавиштам шарҳи ғамро мастирӣ май доштам

می‌نوشتم شرح غم را مستری می‌داشتم

намешуд андар дидаам акси ҳақиқати рӯбаҳи рӯ

می‌شد اندر دیده‌ام عکس حقیقت روبه‌رو

Бар рухи ойӣнагар хокистарӣ май доштам

بر رخ آیینه گر خاکستری می‌داشتم

Назд ин бе донишони фарқи ҳазф аз дар набӯд

نزد این بی‌دانشان فرق حذف از در نبود

Вар на дар баҳри сухани ман гавҳарӣ май доштам !

ور نه در بحر سخن من گوهری می‌داشتم!

Ҳбзо аз мисраи бедил ки туғрул гуфта аст

حبذا از مصرع بیدل که طغرل گفته است

Хок мекардам ба роҳатгар сиррӣ май доштам !

خاک می‌کردم به راهت گر سری می‌داشتم!