Китоб ишқ мехонам кунун фаҳм сабақ кардам

کتاب عشق می‌خوانم کنون فهم سبق کردم

Ба устоди хирад бе ҷои азин мабҳас нутқ кардам

به استاد خرد بی‌جا ازین مبحث نطق کردم

Ҳаме кардам ба калаки фикри таҳрири ҷамол ӯ

همی‌کردم به کلک فکر تحریر جمال او

Ба васфи навбати рухсор ӯ гул дар тибқ кардам

به وصف نوبت رخسار او گل در طبق کردم

Азони рӯзӣ ки бинмудам ба ҷинати нисбати кӯяш

ازآن روزی که بنمودم به جنت نسبت کویش

зи хиҷлати оби гаштами хешро ғарқ арақ кардам

ز خجلت آب گشتم خویش را غرق عرق کردم

Намудем ман қазои суннати пешини худ дигар

نمودم من قضای سنت پیشین خود دیگر

Ба зери шоми зулфаш рӯй ӯ фаҳм шафақ кардам

به زیر شام زلفش روی او فهم شفق کردم

Камар чун хома барбастам ба тавсифи саропояш

کمر چون خامه بربستم به توصیف سراپایش

Қалам дар шаҳди мазмун лабаш афтод шқ кардам

قلم در شهد مضمون لبش افتاد شق کردم

Басии халқ ҷаҳон бинвишта шарҳи нусхаи ҳасанаш

بسی خلق جهان بنوشته شرح نسخه حسنش

Ман андари мусҳафи рӯйиши зи барги гул варақ кардам

من اندر مصحف رویش ز برگ گل ورق کردم

Мапурс аз раъйати мансӯрии ин доругири ман

مپرس از رأیت منصوری این داروگیر من

Ҳамин баси шоҳидам дар ишқ ӯ даъвоӣ ҳақ кардам

همین بس شاهدم در عشق او دعوای حق کردم

зи дарси ишқ ӯ бо ман нашуд ғайр аз ҷунуни ҳосил

ز درس عشق او با من نشد غیر از جنون حاصل

Чу маҷнӯни хешро расвои олами зин сабақ кардам

چو مجنون خویش را رسوای عالم زین سبق کردم

Чаҳ хуш гуфтаст туғрули ҳазрати баҳри сухани бедил

چه خوش گفته‌ست طغرل حضرت بحر سخن بیدل

Ба соғари оби рӯеи доштами сад рамақ кардам

به ساغر آب رویی داشتم سد رمق کردم