Ба мизроб дигар қонӯни ишқат соз ме кардам
به مضراب دگر قانون عشقت ساز میکردم
Навой парда « ушшоқат » аз « Шаҳноз » мекардам !
نوای پرده «عشاقت » از «شهناز» میکردم!
Чу мурғ бепару болами ман аз афтодагии лекин
چو مرغ بی پر و بالم من از افتادگی لیکن
Ба сӯят бетаваққуф чун нигаҳ парвоз мекардам !
به سویت بیتوقف چون نگه پرواز میکردم!
Ба маҳзи лутфи сӯии кулба ман ме хиромедӣ
به محض لطف سوی کلبه من میخرامیدی
Ба роҳати пардаҳои дида пой андоз ме кардам
به راهت پردههای دیده پایانداز میکردم
Агар май буд дар ҳиҷри ту ҳамчун кӯҳи тамкинам
اگر میبود در هجر تو همچون کوه تمکینم
Садое мешунидам аз тугар овоз мекардам !
صدایی میشنیدم از تو گر آواز میکردم!
Тағофули монеъи асрори лутфаш буд ва ман ҳар дам
تغافل مانع اسرار لطفش بود و من هر دم
Ба рамзии гӯшаи он чашмро ғаммоз ме кардам
به رمزی گوشه آن چشم را غماز میکردم
Азони рӯзӣ ки дидам дар фани эҳёи лаби лаълаш
ازآن روزی که دیدم در فن احیا لب لعلش
Масеҳо мешудам ман тарки ин эъҷоз мекардам !
مسیحا میشدم من ترک این اعجاز میکردم!
Ҳаме рафтам ба таври ишқ ӯ аз баҳри дидораш
همیرفتم به طور عشق او از بهر دیدارش
Чу Мӯсо дар таҷаллии гоҳи шавқаш роз ме кардам
چو موسی در تجلیگاه شوقش راز میکردم
Агар дар хоб медидам ба ногуҳи талъати Лайлӣ
اگر در خواب میدیدم به ناگه طلعت لیلی
Ҳазор анҷоми маҷнӯнро ба як оғоз мекардам !
هزار انجام مجنون را به یک آغاز میکردم!
Ба базми васли зонгштми шамем атр ме омад
به بزم وصل زانگشتم شمیم عطر میآمد
Агар банди қабояшро ба ногуҳ боз ме кардам
اگر بند قبایش را به ناگه باز میکردم
Намуданд аз сари кӯии ту бо ман равзаи ҷинат
نمودند از سر کوی تو با من روضه جنت
Наме будӣ ту дар ҷинати валикин ноз ме кардам
نمیبودی تو در جنت ولیکن ناز میکردم
Хушо аз мисраи султони авранги сухани туғрул
خوشا از مصرع سلطان اورنگ سخن طغرل
Ту мерафтӣ ва ман шӯри қиёмат соз мекардам !
تو میرفتی و من شور قیامت ساز میکردم!