Ба олами хешро аз бе худии афсона май созам
به عالم خویش را از بیخودی افسانه میسازم
Ба ёди ҷоми васлаши наъраи мастона май созам !
به یاد جام وصلش نعره مستانه میسازم!
Агар бошад калиди қуфли ҷинати саҳнаи зоҳид
اگر باشد کلید قفل جنت صحنه زاهد
зи ашки хеши ман ҳам сбҳаҳи сад дона май созам !
ز اشک خویش من هم سبحه صد دانه میسازم!
Ба мардумгар ҳамин бошад тариқи ошноӣ ҳо
به مردم گر همین باشد طریق آشناییها
Чу ашки нӯки мижгони хешро бегона май созам !
چو اشک نوک مژگان خویش را بیگانه میسازم!
Мапурсед аз саводи қиссаи рӯзи сиёҳи ман
مپرسید از سواد قصه روز سیاه من
Шаби он зулфро кӯтаҳи азин афсона май созам !
شب آن زلف را کوته ازین افسانه میسازم!
Агар сомони истиғноу тамкини ту ин бошад
اگر سامان استغنا و تمکین تو این باشد
Ба роҳати зи интизор аз чӯби наргиси хона май созам !
به راهت ز انتظار از چوب نرگس خانه میسازم!
Хаёли зулфаш аз хоб парешон кард бедорам
خیال زلفش از خواب پریشان کرد بیدارم
Қалам дар васфи тобиш аз забони шона май созам
قلم در وصف تابش از زبان شانه میسازم
Адояти гашт акнӯн монеъи завқи суҷуди ман
ادایت گشت اکنون مانع ذوق سجود من
Бути нозофаринамгар туе бтхонаҳ май созам !
بت نازآفرینم گر تویی بتخانه میسازم!
Фурӯғи оризат ҳар ҷои чароғи базм маҳфил шуд
فروغ عارضت هر جا چراغ بزم محفل شد
Ба гирди шамъи рӯяти хешро парвона май созам
به گرد شمع رویت خویش را پروانه میسازم
Наме тарсами зи найрангу фусуни мори он гесу
نمیترسم ز نیرنگ و فسون مار آن گیسو
Ватан чун ганҷ умрӣ шуд ки дар вайрона май созам !
وطن چون گنج عمری شد که در ویرانه میسازم!
Азон рӯзӣ ки шуд побанди занҷири сари зулфат
ازان روزی که شد پابند زنجیر سر زلفت
Ба занҷират ки худро баъди азин девона май созам !
به زنجیرت که خود را بعد ازین دیوانه میسازم!
Чаҳ хуш гуфтаст ӣнҷои бедили базми адаби туғрул
چه خوش گفتهست اینجا بیدل بزم ادب طغرل
Ҳамон гирди сарат май гирдаму паймона май созам
همان گرد سرت میگردم و پیمانه میسازم