Набошад ҷузи ҳисоби ғам ба ҷадвали хати тақвимам
نباشد جز حساب غم به جدول خط تقویمم
Ки маҷнӯн дар дабистон ҷунун додаст таълимам
که مجنون در دبستان جنون دادست تعلیمم
Шуморами нақди имрӯз аз камоли фурсати фардо
شمارم نقد امروز از کمال فرصت فردا
Чу моҳи нав буд дар маснади таърихи тақдимам
چو ماه نو بود در مسند تاریخ تقدیمم
Басии лоф муҳаббат мезадам дар силки ушшоқаш
بسی لاف محبت میزدم در سلک عشاقش
Марои охири ҷавози ин мунодӣ кард трхимм
مرا آخر جواز این منادی کرد ترخیمم
Ба меҳр бехудӣ шуд хатми тғроиии мисоли ман
به مهر بیخودی شد ختم طغرایی مثال من
намебошад ҷузи аҳкоми ҷунуни дигар дар иқлӣмам
نمیباشد جز احکام جنون دیگر در اقلیمم
Гудозам карда саррофи қазо дар бутаи меҳнат
گدازم کرده صراف قضا در بوته محنت
Айёр пок дорам нест аз айби касони бимам
عیار پاک دارم نیست از عیب کسان بیمم
Азони рӯзӣ ки шуд амрам дар иқлӣми сухани ҷорӣ
ازآن روزی که شد امرم در اقلیم سخن جاری
Ба ҷузи бахт сияҳ набӯд ба фарқи хеши диҳимм
به جز بخت سیه نبود به فرق خویش دیهیمم
Чунон сомон доман кардаам кунҷи қаноат ро
چنان سامان دامن کردهام کنج قناعت را
Ки андар дил намебошад таманнои зару симам
که اندر دل نمیباشد تمنای زر و سیمم
Насибӣ нест ҷузи мироси маҷнӯн аз қазо бо ман
نصیبی نیست جز میراث مجنون از قضا با من
Ҳамин бошад маро аз сарнавишти ҷабҳаи тақсимам
همین باشد مرا از سرنوشت جبهه تقسیمم
Ба сунбули қиссаи зулфи биногвашаш баён кардам
به سنبل قصه زلف بناگوشش بیان کردم
Ба рӯй гули зи хиҷлат то набард аз шарми таъмимам
به روی گل ز خجلت تا نبرد از شرم تعمیمم
Ба таҳрири табассум аз лаби лаълаш ҳаме ҷӯшад
به تحریر تبسم از لب لعلش همیجوشد
Зулоли зиндагӣ чун мавҷ май аз чашмаи мимм
زلال زندگی چون موج می از چشمه میمم
зи роҳи бихўдии имрӯз монанди сиришки худ
ز راه بیخودی امروز مانند سرشک خود
Сиррӣ дар пой ӯ меафканам инаст тасмимам
سری در پای او میافکنم اینست تصمیمم
Қалам омад паии таҳрири мавҷи теғи абрӯяш
قلم آمد پی تحریر موج تیغ ابرویش
Ҳилол аз чарх чун қавси қзҳ хам шуд ба таъзимам
هلال از چرخ چون قوس قزح خم شد به تعظیمم
Хушо аз мисраи султони авранги сухани бедил
خوشا از مصرع سلطان اورنگ سخن بیدل
Шиквау фақри малик бениёзӣ кард таслимам
شکوه و فقر ملک بینیازی کرد تسلیمم