Надорад майли улфати вазъи озодии писанди мо
ندارد میل الفت وضع آزادیپسند ما
Буд чун сарви урёнӣ ба бар моро паранд мо
بود چون سرو عریانی به بر ما را پرند ما
Садои маҳмили роҳ нафас шуд изтироби дил
صدای محمل راه نفس شد اضطراب دل
Ба ғайр аз нола кӣ хезад дигар дард аз сапанди мо ? !
به غیر از ناله کی خیزد دگر درد از سپند ما؟!
Лаби ширин чу хусрави сарнавишти хома мо шуд
لب شیرین چو خسرو سرنوشت خامه ما شد
Шукри резади саропои ҳамчуи не аз банди банди мо !
شکر ریزد سراپا همچو نی از بند بند ما!
Муҳӣти як ҷаҳони маънии шудеми имрӯз дар олам
محیط یک جهان معنی شدیم امروز در عالم
Садои кӯс навбат мезанад кӯҳи паҳнади мо
صدای کوس نوبت میزند کوه پهند ما
з бас дорем мо ғаввосии баҳри сухан акнӯн
ز بس داریم ما غواصی بحر سخن اکنون
Гуҳар аз қулзум маънӣ кашад фикри баланди мо
گهر از قلزم معنی کشد فکر بلند ما
Ғизоли дашти ваҳшати гашти сайди водии улфат
غزال دشت وحشت گشت صید وادی الفت
зи тори риштаи фикр расо бошад каманди мо
ز تار رشته فکر رسا باشد کمند ما
Хироми роизи калаки кафи моро чаҳ май пурсӣ ? !
خرام رایض کلک کف ما را چه میپرسی؟!
Ду оламро намояди тай ба як ҷавлони саманди мо !
دو عالم را نماید طی به یک جولان سمند ما!
Ба қуллоби нафаси як олимӣ дар дом мо бошад
به قلاب نفس یک عالمی در دام ما باشد
Раҳоӣ нест Аслан сайди маъниро зи банди мо !
رهایی نیست اصلا صید معنی را ز بند ما!
Хушо туғрули азин як мисраи бедил ки ме гуяд
خوشا طغرل ازین یک مصرع بیدل که میگوید
Чаро дар банди нақш мо набошад Нақшбанди мо ? !
چرا در بند نقش ما نباشد نقشبند ما؟!