Моҳи тамоми ман ки манам мустаманди ту
ماه تمام من که منم مستمند تو
Мурғи дилами фитода ба доми каманди ту
مرغ دلم فتاده به دام کمند تو
Рафтори хеши Кебеки дарӣ тарк ме кунад
رفتار خویش کبک دری ترک میکند
Бинад агар хироми қади дилписанди ту
بیند اگر خرام قد دلپسند تو
Дар малики ҳасани хусрави фармонравои туе
در ملک حسن خسرو فرمانروا تویی
Дил нест дар ҷаҳон ки набошад ба банди ту !
دل نیست در جهان که نباشد به بند تو!
эй қомати баланди ту сармашқи дилбарӣ
ای قامت بلند تو سرمشق دلبری
Ҷонами фидои қомати болои баланди ту !
جانم فدای قامت بالا بلند تو!
Нарад мафохирати зи фалак май баради замин
نرد مفاخرت ز فلک میبرد زمین
Зеро ки муҳаррамаст ба наъли саманди ту
زیرا که محرم است به نعل سمند تو
Қурбон он шавам ки туро офарӣда аст
قربان آن شوم که تو را آفریده است
Дар ҳар куҷо буд сухан аз чун ва чанд ту
در هر کجا بود سخن از چون و چند تو
Лабҳои ғунча во нашавадгар рӯй ба боғ
لبهای غنچه وا نشود گر روی به باغ
Аз шарми хандаи лаби ширини зи қанди ту
از شرم خنده لب شیرین ز قند تو
Ёд аз ҳавои саҷда абрӯат ме кунад
یاد از هوای سجده ابروت میکند
Туғрул накарда ваҳми з теғ паранд ту
طغرل نکرده وهم ز تیغ پرند تو