зи худ бисёр даври афтодам аз маънии қаринӣ ҳо
ز خود بسیار دور افتادم از معنی قرینیها
Марои сармашқи ҳиронист акнӯн мӯии чинӣ ҳо
مرا سرمشق حیرانیست اکنون موی چینیها
Тавон дар мазраъи боғи ҷаҳони гул аз адаб чидан
توان در مزرع باغ جهان گل از ادب چیدن
Ки сад хирмани намоеи ҳосили азин хӯшаи чинӣ ҳо
که صد خرمن نمایی حاصل ازین خوشهچینیها
Муродӣ кӣ буд ғайр аз тасаллии бахши оромиш
مرادی کی بود غیر از تسلیبخش آرامش
Набошад баҳраи Лайлиро азин маҳмили нишиниҳо !
نباشد بهره لیلی را ازین محملنشینیها!
зи шарми он ки фардои муҳаррами меҳр батон бошӣ
ز شرم آن که فردا محرم مهر بتان باشی
Ба шабнами ғӯтаи зани имрӯз аз хиҷлати ҷабинӣ ҳо
به شبنم غوطه زن امروز از خجلت جبینیها
Баланди афтода аз ноэътибории эътибори ман
بلند افتاده از نااعتباری اعتبار من
Ки аз номами арақ гул мекунад аз бенигинӣ ҳо
که از نامم عرق گل میکند از بینگینیها
Дамии зи андешаи дил дар паии сайди маъонии шӯ
دمی ز اندیشه دل در پی صید معانی شو
Агар бошад расои фикри ту дар маънии камӣнӣ ҳо
اگر باشد رسا فکر تو در معنی کمینیها
Кунун ҷинси қумоши хешро туғрул ба арзи орм
کنون جنس قماش خویش را طغرل به عرض آرم
Муродӣ кӣ шавад ҳосили азин хилват гузиниҳо ? !
مرادی کی شود حاصل ازین خلوتگزینیها؟!