Сунбул аз ошуфтагии зулфи кажати як печу тоб
سنبل از آشفتگی زلف کژت یک پیچ و تاب
Мусҳаф рӯй туам тафсир дорад сад китоб
مصحف روی توام تفسیر دارد صد کتاب
Юсуф аз шарми ҷамолати маҳв зиндон гашта аст
یوسف از شرم جمالت محو زندان گشته است
эй ҷамоли олами орои ту равшани зи офтоб !
ای جمال عالمآرای تو روشن ز آفتاب!
Дар таманнои висолати дайну дил бар бод шуд
در تمنای وصالت دین و دل بر باد شد
Оқибати дастам ба домони ту дар явми алҳсоб !
عاقبت دستم به دامان تو در یومالحساب!
Ҷом май бо ғайр май нӯшии ту эй раъно чаро ? !
جام می با غیر مینوشی تو ای رعنا چرا؟!
зи оташи ҳасрати дилу ҷони маросозӣ кабоб !
ز آتش حسرت دل و جان مرا سازی کباب!
Обу тоби ориз ва зулфат надорад бӯстон
آب و تاب عارض و زلفت ندارد بوستان
Сунбулу гул ҳар ду аз зулфу рахт беобу тоб
سنبل و گل هر دو از زلف و رخت بی آب و تاب
Нест аз ишқати насиби ман ба ҷузи доғи фироқ
نیست از عشقت نصیب من به جز داغ فراق
Аз май васли ту дар гетӣ нагаштам комёб !
از می وصل تو در گیتی نگشتم کامیاب!
Туғрул аз акси ҷамолаши маҳв ҳайрат гашта ам
طغرل از عکس جمالش محو حیرت گشتهام
То фиканд аз оризи моҳи худ он дилбари ниқоб !
تا فکند از عارض ماه خود آن دلبر نقاب!