То зулфи ту дар хирмани гули ғолия без аст

تا زلف تو در خرمن گل غالیه‌بیز است

Дар даври қамари байн ки қирони муштарӣ рез аст

در دور قمر بین که قران مشتری‌ریز است

Тарсам ки ба дил рахна занад мардуми чашмат

ترسم که به دل رخنه زند مردم چشمت

Варна з чаҳ рӯи ханҷари мижгони ту тезаст ? !

ورنه ز چه رو خنجر مژگان تو تیز است؟!

Мақтӯли туро нест азони сӯрати мурдан

مقتول تو را نیست ازآن صورت مردن

Барқи дами шамшери ту то ойӣна рез аст

برق دم شمشیر تو تا آیینه ریز است

Заҳматкаши ишқам ки чаҳ ҳиҷрон ва чаҳ васлат

زحمتکش عشقم که چه هجران و چه وصلت

Аз дасти ҷафои ту куҷои ҷой гурезаст ? !

از دست جفای تو کجا جای گریز است؟!

Ҳарҷо ки зи нақши кафи пой ту нишонеаст

هرجا که ز نقش کف پای تو نشانیست

Чун арсаи маҳшари ҳамаи дилами ғулғула хез аст

چون عرصه محشر همه دلم غلغله‌خیز است

Афсонаи ҳасани ту ҳар он гӯш ки бишунид

افسانه حسن تو هر آن گوش که بشنید

Дар даъвии зебои Юсуф ба ситез аст

در دعوی زیبایی یوسف به ستیز است

Ҳаркас ки саводи хати мишкӣни туро дид

هرکس که سواد خط مشکین تو را دید

Дар қофия ҳасан бигуфто ки тамиз аст

در قافیه حسن بگفتا که تمیز است

Фарҳанги суханҳои дақиқи ман туғрул

فرهنگ سخن‌های دقیق من طغرل

На тавр « сроҳ »аст на гуфтор « ҳмиз » аст

نه طور «صراح» است نه گفتار «همیز» است