Агар инаст тундии тавсани ҷавлони шитобаш ро
اگر اینست تندی توسن جولان شتابش را
Ғубори хоки шӯ то ворасии бӯси рикобашро !
غبار خاک شو تا وارسی بوس رکابش را!
зи тори риштаи андешаи дузами ҷомаи нозаш
ز تار رشته اندیشه دوزم جامه نازش
Ҳадиси накҳати гул май дарди тарафи ниқобаш ро
حدیث نکهت گل میدرد طرف نقابش را
Агар хуонеи хаттӣ аз мусҳафи рухсораи Лайлӣ
اگر خوانی خطی از مصحف رخساره لیلی
Нисори равзаи маҷнӯни намои нақди савобашро !
نثار روضه مجنون نما نقد ثوابش را!
Дили ҳайрати пурситамро набошад ҷузи тапиши судӣ
دل حیرتپرستم را نباشد جز تپش سودی
Магар ором бахшад ҷилва ӯ изтиробашро ? !
مگر آرام بخشد جلوه او اضطرابش را؟!
Ба лаб зон хати мавзунаши ниҳодами меҳри хомӯшӣ
به لب زان خط موزونش نهادم مهر خاموشی
Қалам аз мӯии чинӣ ме тавон кардани китобашро !
قلم از موی چینی میتوان کردن کتابش را!
Ба мизроби ғамаши касро набошад нохуни дахлӣ
به مضراب غمش کس را نباشد ناخن دخلی
Магар аз нола булбул кунад тори рубобашро ? !
مگر از ناله بلبل کند تار ربابش را؟!
Ба таҳрири саводи нусхаи ошуфтаи зулфаш
به تحریر سواد نسخه آشفته زلفش
зи мавҷ май рақам бояд шикасти печу тобишро !
ز موج می رقم باید شکست پیچ و تابش را!
Агар дории хаёли хоки пои тавсанаш бӯдан
اگر داری خیال خاک پای توسنش بودن
Намои вирди забон ё литнии канти туробаш ро
نما ورد زبان یا لیتنی کنت ترابش را
Хуш омад дар мазоқами туғрули ин як мисраи бедил
خوش آمد در مذاقم طغرل این یک مصرع بیدل
Барин сарчашма раҳмӣ кун ки мавҷӣ нест обашро !
برین سرچشمه رحمی کن که موجی نیست آبش را!