Ҳалқа зуннор шуд то зулфи ънбрсои ту

حلقه زنار شد تا زلف عنبرسای تو

Хӯни мардуми рехт яксар наргиси Шаҳлои ту

خون مردم ریخت یکسر نرگس شهلای تو

Сарв ва тӯбо шуд хаҷал аз он қади болои ту

سرو و طوبی شد خجل از آن قد بالای تو

эй ки Юсуфро ба бозор оварад савдои ту

ای که یوسف را به بازار آورد سودای تو

Мӯъҷизи исои намояди лаъли ҷони афзои ту !

معجز عیسی نماید لعل جان‌افزای تو!

Бас ки будам дар ғамати ошуфта ҳамчун ёсуман

بس که بودم در غمت آشفته همچون یاسمن

Аз фироқати шуъла бар дӯшам чу шамъи анҷуман

از فراقت شعله بر دوشم چو شمع انجمن

Ғунчаи лаъли лабатро ошноӣ дар сухан

غنچه لعل لبت را آشنایی در سخن

Нест эй бдхўи тағофул чанд бошад роҳзан

نیست ای بدخو تغافل چند باشد راهزن

Лутф набӯдгар ғазабсозӣ навозишҳои ту !

لطف نبود گر غضب سازی نوازش‌های تو!

Як сухан аз лаъли хомӯш ту дорам орзӯ

یک سخن از لعل خاموش تو دارم آرزو

Ҷуз май васлат маро набӯд ба олами ҷустуҷӯ

جز می وصلت مرا نبود به عالم جستجو

Акси рухсори ту дар ойӣнаи дили рӯбаҳи рӯ

عکس رخسار تو در آیینه دل روبه‌رو

Ҳамчуи тӯтӣ бо рахт пайваста додам гуфтугӯ

همچو طوطی با رخت پیوسته دادم گفتگو

Ганҷи сони вайронаи дили манзилу мأўои ту !

گنج‌سان ویرانه دل منزل و مأوای تو!

Бо кадомин гуфтугӯи васфи туро созами баён ? !

با کدامین گفتگو وصف تو را سازم بیان؟!

Аз забон зарра наояд мадҳи хуршеди ҷаҳон !

از زبان ذره نآید مدح خورشید جهان!

Бас ки мумтозии зи хубони ҳамчуи ма аз ахтарон

بس که ممتازی ز خوبان همچو مه از اختران

Лаби шукри дандони гуҳари гули перҳани абрўкмон

لب‌شکر دندان‌گهر گل‌پیرهن ابروکمان

Малики хӯбӣ тай намудем нест як ҳамтои ту !

ملک خوبی طی نمودم نیست یک همتای تو!

Ҷони з тан ояд бурун наояд зи дили ишқати бурун

جان ز تن آید برون نآید ز دل عشقت برون

То ба кисозӣ ҷафо бар ҳоли зорам раҳм кун !

تا به کی سازی جفا بر حال زارم رحم کن!

Тоқату сабру қарорами рафта ва ҳолам шуд забун

طاقت و صبر و قرارم رفته و حالم شد زبون

намесазад гирад зи ман маҷнӯни таълими ҷунун

می‌سزد گیرد ز من مجنون تعلیم جنون

Тўтёии чашми созами хоки кафши пои ту !

توتیای چشم سازم خاک کفش پای تو!

эй ки дар гулзори хӯбӣ чун ту гулро кас надид

ای که در گلزار خوبی چون تو گل را کس ندید

Аз чаманзори ҷамолати ғунчаеро кас начед

از چمنزار جمالت غنچه‌ای را کس نچید

Қоматат аз ҷӯйбори нози сар боло кашид

قامتت از جویبار ناز سر بالا کشید

Сабзаи лаъли лабат то дар лаб кавсар дамид

سبزه لعل لبت تا در لب کوثر دمید

намечарад оҳӯии ишқи ман чу дар саҳрои ту

می‌چرد آهوی عشق من چو در صحرای تو

На?ил гашта ин тани маҳҷӯр бесабру шикеб

نال گشته این تن مهجور بی‌صبر و شکیب

Кош аз шамъи ҷамолат кулба ам ёбад насиб

کاش از شمع جمالت کلبه‌ام یابد نصیب

Нахли ин гулшан самар оварад аз науммат чу себ

نخل این گلشن ثمر آورد از نامت چو سیب

Камтарин аз хоки бӯсони сари Кувайти нақиб

کمترین از خاک‌بوسان سر کویت نقیب

Ҷуръа роҳат нашуд дар комам аз саҳбои ту !

جرعه راحت نشد در کامم از صهبای تو!