Чанд теғи зулмро аз куштанам хунин кунӣ
چند تیغ ظلم را از کشتنم خونین کنی
Дам барои қатлами оеу дамӣ тамкин кунӣ
دم برای قتلم آیی و دمی تمکین کنی
Аз чаҳ мурғи дил ба доми турра мишкӣн кунӣ
از چه مرغ دل به دام طره مشکین کنی
То кӣ эй дилбари дилам бемӯҷибӣ ғамгин кунӣ
تا کی ای دلبر دلم بیموجبی غمگین کنی
Гиряҳои талхи ман бинӣу лаб ширин кунӣ ? !
گریههای تلخ من بینی و لب شیرین کنی؟!
Хок шуд ин қолаби афсурда дар роҳи талаб
خاک شد این قالب افسرده در راه طلب
Коми ҷон ҳосил нашуд бо ман зи лутфати ҷузи ғазаб
کام جان حاصل نشد با من ز لطفت جز غضب
Гоҳи хурсандии зи ман гоҳе биринҷӣ бесабаб !
گاه خرسندی ز من گاهی برنجی بیسبب!
Гуфтае ҷонат ба коми дили расонам ё ба лаб ?
گفتهای جانت به کام دل رسانم یا به لب؟
Он нахоҳӣ кард донам ҳаргиз аммо ин кунӣ !
آن نخواهی کرد دانم هرگز اما این کنی!
Дар ҳарими ҳурмати васлат касе восил нашуд
در حریم حرمت وصلت کسی واصل نشد
То чу булбули ишқ ӯ зи оҳу афғон комил нашуд
تا چو بلبل عشق او ز آه و افغان کامل نشد
Оризаш чун каҳрабо то бо хазон шомил нашуд
عارضش چون کهربا تا با خزان شامل نشد
Аз гул рӯй туами рангии ҷузин ҳосил нашуд
از گل روی توام رنگی جزین حاصل نشد
Каз сиришки арғавонӣ чеҳраам рангин кунӣ
کز سرشک ارغوانی چهرهام رنگین کنی
Дам ба дами девонагӣ аз ишқат афзоед маро
دم به دم دیوانگی از عشقت افزاید مرا
Нохуни тадбири ҳаргиз уқда накушояд маро !
ناخن تدبیر هرگز عقده نگشاید مرا!
Хотами дасти сулаймонгар ба даст ояд маро
خاتم دست سلیمان گر به دست آید مرا
Сар ба тоҷи салтанати дигар фурӯ наояд маро
سر به تاج سلطنت دیگر فرو نآید مرا
Гар ҳамаи умри илтифотӣ бо ман мискин кунӣ !
گر همه عمر التفاتی با من مسکین کنی!
Ошиқонро зиндагии давр аз ту мебошад маҳол
عاشقان را زندگی دور از تو میباشد محال
Аз сари Кувайти бурун рафтан маро набӯд хаёл
از سر کویت برون رفتن مرا نبود خیال
Дар ҷавоб туғрул омад муждаи ҳангоми суол
در جواب طغرل آمد مژده هنگام سوال
Ҷинат алФрдўс бинмоӣанд дар хобат « камол »
جنتالفردوس بنمایند در خوابت «کمال»
Гар шабии хок дар он моҳро болин кунӣ !
گر شبی خاک در آن ماه را بالین کنی!