Аз рахти ойӣна то лиззат дидор гирифт
از رخت آیینه تا لذت دیدار گرفت
Вази нигоҳи дгарони ҷониби худ ор гирифт
وز نگاه دگران جانب خود عار گرفت
Хоки раҳ аз қидмати рутба гулзор гирифт
خاک ره از قدمت رتبه گلزار گرفت
Аз ту гулҳои чамани зинат дастор гирифт
از تو گلهای چمن زینت دستار گرفت
Ман чаҳ гуфтам ки дили нозукат озор гирифт
من چه گفتم که دل نازکت آزار گرفت
Хотират аз ман бечора ба якбор гирифт ? !
خاطرت از من بیچاره به یکبار گرفت؟!
То нишастам ба раҳати баҳри таманнои висол
تا نشستم به رهت بهر تمنای وصال
Дидаи вақф ту намудем шабу рӯзу мау сол
دیده وقف تو نمودم شب و روز و مه و سال
Бе ҷамоли ту марои зиндагии даҳри маҳол
بیجمال تو مرا زندگی دهر محال
Аз ман длшдаҳи як бори нпрсидии ҳол !
از من دلشده یک بار نپرسیدی حال!
Ман чаҳ гуфтам ки дили нозукат озор гирифт
من چه گفتم که دل نازکت آزار گرفت
Хотират аз ман бечора ба якбор гирифт ? !
خاطرت از من بیچاره به یکبار گرفت؟!
Чанд нолами зи гул рӯй ту чун булбули зор
چند نالم ز گل روی تو چون بلبل زار
Ҳамчуи парвонаи занами болу пари хеш ба нор ?
همچو پروانه زنم بال و پر خویش به نار؟
Бардаи савдои ту яксар зи дилами сабру қарор
برده سودای تو یکسر ز دلم صبر و قرار
Ранги рухсори марои байн ва ба ҳолами раҳми ор !
رنگ رخسار مرا بین و به حالم رحم آر!
Ман чаҳ гуфтам ки дили нозукат озор гирифт
من چه گفتم که دل نازکت آزار گرفت
Хотират аз ман бечора ба якбор гирифт ? !
خاطرت از من بیچاره به یکبار گرفت؟!
Калаки тақдир ки тасвир ту мекард рақам
کلک تقدیر که تصویر تو میکرد رقم
Дар азал бо хат ӯ ман ба ту будам тавъам
در ازل با خط او من به تو بودم توأم
Доштам бар сари худ ишқи ту дар малики адам
داشتم بر سر خود عشق تو در ملک عدم
Аз чаҳ бисёр ба мосозӣ навозишҳо кам ? !
از چه بسیار به ما سازی نوازشها کم؟!
Ман чаҳ гуфтам ки дили нозукат озор гирифт
من چه گفتم که دل نازکت آزار گرفت
Хотират аз ман бечора ба якбор гирифт ? !
خاطرت از من بیچاره به یکبار گرفت؟!
Гиряам аз ғами ҳиҷрат ба ҷаҳон тӯфон кард
گریهام از غم هجرت به جهان طوفان کرد
Шабнами ашк аз онҷо ба сар мижгон кард
شبنم اشک از آنجا به سر مژگان کرد
Ҷӯши ин сайли балои қасри дилам вайрон кард
جوش این سیل بلا قصر دلم ویران کرد
Оқибати доғи ту бо хоки маро яксон кард !
عاقبت داغ تو با خاک مرا یکسان کرد!
Ман чаҳ гуфтам ки дили нозукат озор гирифт
من چه گفتم که دل نازکت آزار گرفت
Хотират аз ман бечора ба якбор гирифт ? !
خاطرت از من بیچاره به یکبار گرفت؟!
Ҷайби номӯси марои субҳи сифат чок задӣ
جیب ناموس مرا صبحصفت چاک زدی
Аз нигаҳи тири ғазаб бар дил ғамнок задӣ
از نگه تیر غضب بر دل غمناک زدی
Ноз гуфтӣ ба дилами ханҷар бебок задӣ
ناز گفتی به دلم خنجر بیباک زدی
Барадӣ дар авҷу миёни ҳама бар хок задӣ !
بردی در اوج و میان همه بر خاک زدی!
Ман чаҳ гуфтам ки дили нозукат озор гирифт
من چه گفتم که دل نازکت آزار گرفت
Хотират аз ман бечора ба якбор гирифт ? !
خاطرت از من بیچاره به یکبار گرفت؟!