Баҳор омад ва , офоқро саҳоб гирифт

بهار آمد و، آفاق را سحاب گرفت

зи соя , чеҳраи айём офтоб гирифт

ز سایه، چهره ایام آفتاب گرفت

Ҳаво , замину замони рози гирди кулуфти шаст

هوا، زمین و زمان را ز گرد کلفت شست

Баҳор , баҳри ҷунуни хуши гулӣ дар об гирифт

بهار، بهر جنون خوش گلی در آب گرفت

Чунон азиз нигарадед ғам ки аз шодӣ

چنان عزیز نگردید غم که از شادی

Бўом гиря тавонад кас аз кабоб гирифт

به وام گریه تواند کس از کباب گرفت

Бидод дардисари рӯзгор , даии чандон

بداد دردسر روزگار، دی چندان

Ки хӯни лолаи баҳор аз раг саҳоб гирифт

که خون لاله بهار از رگ سحاب گرفت

Гирифт гарми ҳаворо чунон тарашшӯҳи абр

گرفت گرم هوا را چنان ترشح ابر

Ки хешро бутаи хайма ҳубоб гирифт

که خویش را به ته خیمه حباب گرفت

Ҷаҳони зи файз ҳаво гаштааст олами об

جهان ز فیض هوا گشته است عالم آب

Аҷаб набошад агар захми ҷӯй , об гирифт

عجب نباشد اگر زخم جوی، آب گرفت

зи баси фазои ҷаҳони пари зи накҳат чаман аст

ز بس فضای جهان پر ز نکهت چمن است

Тавон ботши гул аз ҳаво гулоб гирифт

توان به آتش گل از هوا گلاب گرفت

Баҳори баҳри худорои арӯси чаман

بهار بهر خودآرایی عروس چمن

Бмўми оинаи меҳр аз саҳоб гирифт

به موم آینه مهر از سحاب گرفت

Ҳуҷуми накҳати гули танги сохт маҳфил ро

هجوم نکهت گل تنگ ساخت محفل را

Чунонкии ҷои бгрдидн кабоб гирифт

چنانکه جای به گردیدن کباب گرفت

Гумон шавад ки магар меҷаҳд шарор аз санг

گمان شود که مگر می‌جهد شرار از سنگ

зи кӯҳи лолаи зи бас дар нимув шитоб гирифт

ز کوه لاله ز بس در نمو شتاب گرفت

зи бас ки тори нигаҳ реша мекунад чу ниҳол

ز بس که تارِ نگه ریشه می‌کند چو نهال

Нмитўони назар аз гули бҳич боб гирифт

نمی‌توان نظر از گل به هیچ باب گرفت

Чу бод мегузарад нави баҳор аз он гулшан

چو باد میگذرد نو بهار از آن گلشن

Чароғи гули бутаи доман саҳоб гирифт

چراغ گل به ته دامن سحاب گرفت

Басони мӯ ки дар оташ фитад заҳри ҷониб

بسان مو که در آتش فتد ز هر جانب

зи тоби оташи гул , токи печ ва тоб гирифт

ز تاب آتش گل، تاک پیچ و تاب گرفت

Збси шукуфтагии табъ халқ шодобаст

ز بس شکفتگی طبع خلق شادابست

Тавон зи хандаи гули баъд аз ин гулоб гирифт

توان ز خنده گل بعد از این گلاب گرفت

зи шӯхи чашмии ахтар чу глрхони араб

ز شوخ چشمی اختر چو گلرخان عرب

Чамани ниқоби сияҳ бар рух аз саҳоб гирифт

چمن نقاب سیه بر رخ از سحاب گرفت

Дар оташаст заҳри доғи лола , наъли баҳор !

در آتش است زهر داغ لاله، نعل بهار!

Кадоми гули зи рухи хештан ниқоб гирифт ? !

کدام گل ز رخ خویشتن نقاب گرفت!؟

Бкўаҳу дашт , гулу лолаи мавҷ зан гардид

به کوه و دشت، گل و لاله موج‌زن گردید

Чунонкии роҳи бгрдидн сароб гирифт

چنان که راه به گردیدن سراب گرفت

зи сабзаи кӯҳ чунин болад ар бахуд , чаҳ аҷаб ?

ز سبزه کوه چنین بالد ار به خود، چه عجب

Тавонад аз раҳ омад шуд саҳоб гирифт !

تواند از ره آمد شد سحاب گرفت!

Фишурдаи танги баҳами гули чунон зи ҷӯши баҳор

فشرده تنگ به هم گل چنان ز جوش بهار

Ки бе миёнҷии оташи тавон гулоб гирифт

که بی میانجی آتش توان گلاب گرفت

зи хоки сабза тар мекашад аз он қомат

ز خاک سبزهٔ تر می‌کشد از آن قامت

Ки шоҳро битавонад магар рикоб гирифт

که شاه را بتواند مگر رکاب گرفت

Шаҳи сарири имомат « ризо » ки бо меҳраш

شه سریر امامت «رضا» که با مهرش

Касе бҳшр нахоҳад зи кас ҳисоб гирифт

کسی به حشر نخواهد ز کس حساب گرفت

Бзир чарх нагунҷад шикваи шавкат ӯ

به زیر چرخ نگنجد شکوه شوکت او

Ки баҳрро натавонади бабр ҳубоб гирифт

که بحر را نتواند به بر حباب گرفت

Бадӯри бинии даргоҳи қадар ӯ хуршед

به دور بینی درگاه قدر او خورشید

Ба пеши дидаи худ даст аз саҳоб гирифт

به پیش دیده خود دست از سحاب گرفت

зи акси гунбад ӯ , офтоб гирад нур

ز عکس گنبد او، آفتاب گیرد نور

Чунонкии лаъл аз хуршеди об ва тоб гирифт

چنانکه لعل از خورشید آب و تاب گرفت

Чунон хазиди баҳами зулмати шаб аз нураш

چنان خزید به هم ظلمت شب از نورش

Ки роҳ бар гузари новак шаҳоб гирифт

که راه بر گذر ناوک شهاب گرفت

Саводи нусхаи райш магар кунад равшан

سواد نسخه رایش مگر کند روشن

Аз он сипеҳри бкФ , лавҳ офтоб гирифт

از آن سپهر به کف، لوح آفتاب گرفت

Заданд соҳати қадараши батӯлии умри таноб

زدند ساحت قدرش به طول عمر طناب

Хизри пай шараф омад сар таноб гирифт

خضر پی شرف آمد سر طناب گرفت

зи хоки дарга ӯ бскаҳ ҳаст домангир

ز خاک درگه او بس که هست دامنگیر

Бзўр , авҷи дуоҳои мустаҷоб гирифт

به زور، اوج دعاهای مستجاب گرفت

На равшанӣаст каз он шишаи фалак шудаи пар

نه روشنی است کز آن شیشه فلک شده پر

Ки рой ӯ арақи шарми з офтоб гирифт

که رای او عرق شرم ز آفتاب گرفت

Ҳубоб нест , ки аз резиши саҳоби кафш

حباب نیست، که از ریزش سحاب کفش

з бскаҳ гуфт , нафас дар гулӯӣ об гирифт

ز بس که گفت، نفس در گلوی آب گرفت

Бхўиши шуълаи зи бим сиёсаташ ларзад

به خویش شعله ز بیم سیاستش لرزد

Магари бчўби зи барги гулӣ гулоб гирифт ? !

مگر به چوب ز برگ گلی گلاب گرفت!

зи бас ки расм гирифтани Фгнд аз олам

ز بس که رسم گرفتن فگند از عالم

Намаки брхст ӯ ҳурмат аз шароб гирифт

نمک به رخصت او حرمت از شراب گرفت

Дамии з гиря нёсуд чашми ҳақи бениш

دمی ز گریه نیاسود چشم حق بینش

зи бас дар оташи дили ҷой , чун кабоб гирифт

ز بس در آتش دل جای، چون کباب گرفت

Наёфт айши ҷаҳони раҳи бахотири покаш

نیافت عیش جهان ره به خاطر پاکش

зи гиряи шаш ҷиҳаташро зи бас ки об гирифт

ز گریه شش جهتش را ز بس که آب گرفت

Чунон зи шабнами ашкаши либоси шаб тар шуд

چنان ز شبنم اشکش لباس شب تر شد

Ки рӯзи ҷомаи худро боФтоб гирифт

که روز جامه خود را به آفتاب گرفت

Бшўқи мансаби сқоӣии фазоӣ дараш

به شوق منصب سقائی فضای درش

Баҳор машк бадуш худ аз саҳоб гирифт

بهار مشک به دوش خود از سحاب گرفت

Бирафту рўб ҳаримаш барисам фароашон

به رُفت و روب حریمش به رسم فراشان

Фалаки ду то шуду ҷоруб офтоб гирифт

فلک دو تا شد و جاروب آفتاب گرفت

зи поси муъаддилат ӯ , аҷаб набошад агар

ز پاس معدلت او، عجب نباشد اگر

Садои з кӯҳ наёрад дигар ҷавоб гирифт

صدا ز کوه نیارد دگر جواب گرفت

Фитодаи раъша бар андоми мавҷ аз наяш

فتاده رعشه بر اندام موج از نهیش

Аз инки дасташ дар коса шароб гирифт

از اینکه دستش در کاسه شراب گرفت

Аз он замон ки газандаш расед аз ангур

از آن زمان که گزندش رسید از انگور

Ниҳоли ток аз ин ғуссаи печ ва тоб гирифт

نهال تاک از این غصه پیچ و تاب گرفت

Ман аз куҷоу талоши мдиҳ ӯ зи куҷо ?

من از کجا و تلاش مدیح او ز کجا؟

зи кафи Аннани адаби шавқ онҷноб гирифт !

ز کف عنان ادب شوق آن جناب گرفت!

Мидод нест , ки аз хомаи рехт бар варақам

مداد نیست، که از خامه ریخت بر ورقم

Сухани зи хиҷлати мадҳаши брх ниқоб гирифт

سخن ز خجلت مدحش به رخ نقاب گرفت

Гирифт сяти сухангар турои ҷаҳон , воъиз

گرفت صیت سخن گر ترا جهان، واعظ

зи файзи мадҳати авлод Бутуроб гирифт

ز فیض مدحت اولاد بوتراب گرفت

Битоб сӯии дуои баъди азин Аннани қалам

بتاب سوی دعا بعد ازین عنان قلم

Ки ҳарфи мадҳат ӯ дафтар ва китоб гирифт

که حرف مدحت او دفتر و کتاب گرفت

Муҳӣт то ки тавонад гуҳар гирифт аз абр

محیط تا که تواند گهر گرفت از ابر

Саҳоб то ки тавонад зи баҳр об гирифт

سحاب تا که تواند ز بحر آب گرفت

Худо диҳад ҳамаро ҷазба ӣӣ ки битавонем

خدا دهد همه را جذبه‌ای که بتوانیم

зи баҳри мкрмтши файз беҳисоб гирифт

ز بحر مکرمتش فیض بی حساب گرفت